
कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोग दहशत महसूस करने लगते हैं। अक्सर यह तब पता चलता है जब शरीर में यह काफी फैल चुकी होती है। लेकिन अगर समय रहते इसका पता लग जाए, तो इलाज आसान हो जाता है और ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर अब केवल इलाज पर ही नहीं, बल्कि रोकथाम और शुरुआती पहचान पर भी जोर देते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि 35 साल से अधिक उम्र के पुरुष और महिलाएं अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं ताकि किसी भी गंभीर बीमारी, खासकर कैंसर, का पता शुरुआती अवस्था में ही लगाया जा सके। स्क्रीनिंग टेस्ट यानी जांच के कुछ ऐसे तरीके हैं जो कैंसर को उसके शुरुआती चरण में पहचान सकते हैं, जब लक्षण न के बराबर हों। आइए जानते हैं कि 35 साल की उम्र पार करने के बाद कौन से चार स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर कराएं।
1. नियमित कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट
नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान और रोकथाम का आधार माने जाते हैं। दुनिया भर के विशेषज्ञ इन्हें मान्यता देते हैं।
कोलोनोस्कोपी: 45 साल की उम्र के बाद यह जांच हर व्यक्ति को करानी चाहिए। यह बड़ी आंत के कैंसर और कैंसर बनने से पहले की असामान्य ग्रोथ को पहचानती है। आमतौर पर इसे हर 10 साल में दोहराने की सलाह दी जाती है।
मैमोग्राम: 40 साल से ऊपर की महिलाओं को हर 1-2 साल में एक बार मैमोग्राम करवाना चाहिए। यह स्तन कैंसर का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद करता है।
पैप स्मीयर / एचपीवी टेस्ट: 21 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की पहचान के लिए जरूरी है।
पीएसए टेस्ट: पुरुषों के लिए यह प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत देता है।
2. गैलेरी टेस्ट
गैलेरी टेस्ट आधुनिक तकनीक का अद्भुत उदाहरण है। यह रक्त परीक्षण एक ही सैंपल से 50 से अधिक प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान कर सकता है।
यह टेस्ट खून में मौजूद डीएनए के बदलाव को पहचानकर कैंसर की संभावना बताता है, अक्सर तब जब कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।
जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है या उम्र 35-40 से अधिक है, वे इसे हर साल करवा सकते हैं।
अगर टेस्ट में कोई संकेत मिलता है तो डॉक्टर आगे की जांच कर सकते हैं।
3. जेनेटिक टेस्ट
कई बार कैंसर केवल लाइफस्टाइल से नहीं, बल्कि जेनेटिक कारणों से भी होता है। परिवार में किसी को कम उम्र में कैंसर हुआ हो, तो अन्य सदस्यों में भी जोखिम बढ़ सकता है।
जेनेटिक टेस्ट BRCA1, BRCA2, CHEK2, Lynch Syndrome जैसे जीन म्यूटेशन की पहचान करता है।
अगर किसी जीन में बदलाव पाए जाते हैं, तो डॉक्टर समय पर निगरानी रख सकते हैं, स्कैनिंग करवा सकते हैं और रोकथाम के उपाय सुझा सकते हैं।
4. पूरे शरीर का एमआरआई
फुल बॉडी एमआरआई आधुनिक स्कैनिंग का एक तरीका है, जो बिना रेडिएशन के शरीर के अंदर झांकने का मौका देता है।
यह शुरुआती ट्यूमर और असामान्यताओं को पकड़ सकता है, तब भी जब कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।
गैलेरी टेस्ट या जेनेटिक टेस्ट के साथ इसे मिलाकर करना और भी प्रभावी होता है।
एमआरआई में दिखी हर छोटी असामान्यता चिंता का कारण नहीं होती, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही परिणामों की व्याख्या करें।














