
'वॉर 2' दो जबरदस्त जासूसों के टकराव की कहानी है। कबीर (ऋतिक रोशन) अब एक मर्सिनरी यानी पैसों के लिए जान लेने वाला योद्धा बन चुका है। उसे एक ग्लोबल सीक्रेट सोसाइटी ‘काली’ का हिस्सा बनने पर मजबूर किया जाता है और पहला मिशन मिलता है—कर्नल लूथरा (आशुतोष राणा) की हत्या। इस घटना से लूथरा की बेटी काव्या (कियारा आडवाणी) टूट जाती है और बदला लेने की कसम खाती है। लूथरा की जगह विक्रांत कौल (अनिल कपूर) लेते हैं, जो रॉ के सबसे बेरहम जासूस विक्रम (जूनियर एनटीआर) को मिशन पर भेजते हैं। विक्रम का एक ही मकसद है—कबीर को हर हाल में खत्म करना। आगे क्या होता है, यही फिल्म की बाकी कहानी है।
कहानी और निर्देशन
आदित्य चोपड़ा की कहानी कागज़ पर काफी रोचक लगती है, लेकिन श्रीधर राघवन की पटकथा क्लिशे और कमजोर साबित होती है। अब्बास टायरवाला के संवाद बस ठीक-ठाक हैं।
अयान मुखर्जी का निर्देशन भव्यता और स्केल को अच्छे से संभालता है और पहला हाफ दर्शकों को बांधे रखता है। स्पेन के सलामांका शहर में फिल्माया गया पीछा करने वाला सीन रोमांचक है और इंटरवल पर आने वाला ट्विस्ट चौंकाता है।
लेकिन जैसे ही दूसरा हाफ शुरू होता है, फिल्म की पकड़ ढीली पड़ जाती है। बचपन की फ्लैशबैक ट्रैक दिलचस्प होते हुए भी खिंचती चली जाती है। यही फिल्म की सबसे बड़ी समस्या है—हर सीन जरूरत से ज्यादा लंबा लगता है। ‘काली’ का पूरा कांसेप्ट आम दर्शकों के सिर के ऊपर से निकल जाता है। कुछ सीन्स में तो कहानी काफी बचकानी लगती है, जैसे यॉट वाला सीन। रोमांटिक ट्रैक भी असर नहीं छोड़ पाता।
कलाकारों का प्रदर्शन
ऋतिक रोशन कमजोर स्क्रिप्ट के बावजूद अपने चार्म और परफॉर्मेंस से बाज़ी मार लेते हैं। जूनियर एनटीआर की स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन दमदार अभिनय और स्टार पावर से वो अपनी छाप छोड़ते हैं। कियारा आडवाणी बेहद खूबसूरत लगी हैं और खासतौर पर एक्शन सीन्स में दम दिखाती हैं। अनिल कपूर अच्छे हैं, लेकिन उनके किरदार को बेहतर लिखा जा सकता था। अशुतोष राणा, के. सी. शंकर (गौतम गुलाटी) और वरुण बडोला (विलास सारंग) ठीक-ठाक सपोर्ट देते हैं। बॉबी देओल कैमियो में नज़र आते हैं और ठीक लगते हैं।
संगीत और तकनीकी पहलू
प्रीतम का संगीत औसत है। ‘जनाब-ए-आली’ अपनी फिल्मांकन की वजह से असर छोड़ता है, लेकिन ‘आवन जावन’ खास प्रभावित नहीं करता। संचित और अंकित बल्हारा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म में जान डाल देता है।
बेंजामिन जैस्पर की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। एक्शन सीक्वेंस (स्पाइरो रज़ातोस, फ्रांज स्पिलहॉस, अनल अरासु, ओह सी यंग, क्रेग मैकरे और सुनील रोड्रिग्स) देखने में मजेदार हैं। प्रोडक्शन डिज़ाइन (रजत पोद्दार, अमृता महल नकई) और कॉस्ट्यूम डिज़ाइन (अनाइता श्रॉफ अदजानिया, निहारिका जॉली) लाजवाब हैं। वीएफएक्स ठीक-ठाक है, लेकिन कई सीन्स में रियल जैसा असर नहीं देता। एडिटिंग (आरिफ शेख) ढीली है—फिल्म कम से कम 15-20 मिनट छोटी हो सकती थी।
कुल मिलाकर, ‘वॉर 2’ YRF स्पाई यूनिवर्स की अब तक की सबसे कमजोर कड़ी बनकर उभरती है। बॉक्स ऑफिस पर लंबा वीकेंड इसका शुरुआती बिज़नेस बचा सकता है, लेकिन आगे टिके रहना मुश्किल होगा।














