हिंदी सिनेमा में डबल रोल और ट्रिपल रोल वाली फिल्मों का लंबा इतिहास रहा है। कई बड़े सितारे एक ही फिल्म में दो या तीन अलग-अलग किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन कर चुके हैं। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, गोविंदा और ऋषि कपूर जैसे कलाकारों ने भी अपने करियर में मल्टीपल रोल्स निभाए हैं। लेकिन बॉलीवुड के इतिहास में एक अभिनेता ऐसा भी हुआ, जिसने अभिनय की सीमाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए एक ही फिल्म में नौ अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर इतिहास रच दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस अभिनेता ने अपनी जिंदगी को लेकर भी एक ऐसी बात कही थी, जिसे बाद में लोग उनकी भविष्यवाणी के तौर पर याद करने लगे।
जब अभिनय का पर्याय बन गए संजीव कुमार
यह अभिनेता कोई और नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार संजीव कुमार थे। अपनी बेहतरीन अदाकारी और विविध किरदारों को जीवंत करने की क्षमता के कारण उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम हासिल किया। आज भी उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में गिना जाता है।
फिल्म 'शोले' में ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार ने उन्हें अमर बना दिया। इस भूमिका में उन्होंने अपनी दमदार मौजूदगी से दर्शकों का ऐसा दिल जीता कि फिल्म के अन्य बड़े सितारों के बीच भी उनकी छाप अलग नजर आई। हालांकि उनके करियर में एक ऐसी फिल्म भी रही, जिसने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में एक अनोखी पहचान दिलाई।
'नया दिन नई रात' में दिखाया था अद्भुत अभिनय कौशल
साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'नया दिन नई रात' संजीव कुमार के करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में उनके साथ जया भादुड़ी मुख्य भूमिका में नजर आई थीं। फिल्म की कहानी जितनी दिलचस्प थी, उससे कहीं ज्यादा चर्चा संजीव कुमार द्वारा निभाए गए किरदारों की हुई थी।
जहां आमतौर पर अभिनेता एक या दो भूमिकाओं में दिखाई देते हैं, वहीं संजीव कुमार ने इस फिल्म में पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाए थे। यह केवल संख्या का मामला नहीं था, बल्कि हर किरदार का स्वभाव, व्यक्तित्व और प्रस्तुति पूरी तरह अलग थी। यही वजह रही कि यह प्रदर्शन आज भी अभिनय की मिसाल माना जाता है।
नौ किरदारों के जरिए दिखाए जीवन के नौ रंग
फिल्म में निभाए गए नौ पात्र केवल कहानी का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे मानव जीवन के विभिन्न भावों और अनुभवों का प्रतीक भी माने जाते हैं। संजीव कुमार ने डॉक्टर, साधु, डाकू, पुलिस अधिकारी और कई अन्य विपरीत स्वभाव वाले किरदारों को पर्दे पर उतारा था।
हर भूमिका में उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद अदायगी और चेहरे के भाव इतने अलग थे कि दर्शकों को यह महसूस ही नहीं होता था कि सभी किरदार एक ही अभिनेता निभा रहा है। इस फिल्म के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि अभिनय केवल संवाद बोलने का नाम नहीं, बल्कि हर चरित्र को पूरी तरह जी लेने की कला है।
क्या थी फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी सुष्मा नाम की युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी भूमिका जया भादुड़ी ने निभाई थी। सुष्मा के पिता उसकी शादी करवाना चाहते हैं, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं होती। परिस्थितियों से परेशान होकर वह घर छोड़ देती है और एक नई यात्रा पर निकल पड़ती है।
इस सफर के दौरान उसकी मुलाकात अलग-अलग तरह के लोगों से होती है। यही वे पात्र हैं जिन्हें संजीव कुमार ने निभाया था। कभी वह डॉक्टर के रूप में दिखाई देते हैं तो कभी रहस्यमयी साधु, तो कभी एक खतरनाक डाकू के रूप में। हर मुलाकात सुष्मा के जीवन में नया मोड़ लेकर आती है और कहानी को आगे बढ़ाती है।
फिल्म को दर्शकों ने इसलिए भी पसंद किया क्योंकि इसमें मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी दिखाने की कोशिश की गई थी। संजीव कुमार ने अपने हर किरदार में इतनी गहराई डाली कि फिल्म आज भी उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शुमार की जाती है।
फिल्म से जुड़ी खास बातें
'नया दिन नई रात' का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार ए. भीमसिंह ने किया था। यह फिल्म दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्म 'नवरात्रि' का हिंदी रीमेक थी। मूल फिल्म में महान अभिनेता शिवाजी गणेशन ने भी कई किरदार निभाकर दर्शकों को प्रभावित किया था।
'नवरात्रि' पहले तमिल भाषा में बनी थी और बाद में इसका तेलुगू संस्करण भी तैयार किया गया, जिसमें अक्किनेनी नागेश्वरा राव मुख्य भूमिका में नजर आए थे। हिंदी संस्करण में संजीव कुमार ने इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को निभाया और अपने अभिनय से फिल्म को नई ऊंचाई दी।
फिल्म की स्टारकास्ट भी काफी मजबूत थी। इसमें जया भादुड़ी के अलावा नाजनीन, फरीदा जलाल, ओम प्रकाश, डेविड, ललिता पंवार, टुन टुन और मनोरमा जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। आज भी जब हिंदी सिनेमा में बेहतरीन अभिनय की बात होती है, तो 'नया दिन नई रात' और उसमें संजीव कुमार के नौ किरदारों का जिक्र जरूर किया जाता है।














