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जयपुर के आइकॉनिक सिंगल-स्क्रीन राज मंदिर में वार 2 और कुली की टक्कर उम्मीद से कहीं ज्यादा दिलचस्प बन गई है। परंपरागत धारणा के उलट, जहां बड़े बैनर की फिल्मों को अधिक शो मिलते हैं, राज मंदिर ने गुरुवार के लिए कुली को केवल एक और वार 2 को चार शो आवंटित किए। इसके बावजूद सुबह-सुबह की एडवांस बुकिंग ने पूरा माहौल बदलकर रख दिया। 8:45 बजे वाले एकमात्र शो के लिए कुली ने 250 टिकट बेचकर स्पष्ट संकेत दे दिया कि दर्शकों की डिमांड किस ओर है, जबकि वार 2 के चार शो मिलाकर कुल बिक्री 500 टिकट के आसपास रही। यानी प्रति शो औसतन वार 2 की बिक्री 125 टिकट रही—कुली के आधी।
राज मंदिर में यह रुझान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि कुली को प्राइम-टाइम स्लॉट नहीं मिला। इसके बावजूद गैर-प्रधान समय में इतनी तेज बिक्री यह बताती है कि फिल्म के प्रति दर्शकों की जिज्ञासा और स्टार पावर कितनी मजबूत है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर राज मंदिर में कुली को एक अतिरिक्त शो मिलता, तो कुल टिकट बिक्री में वह वार 2 को भी पीछे छोड़ सकती थी। फिलहाल, सीमित शोकेसिंग के बीच भी कुली की मांग “हाउसफुल एडवांस” की दिशा में बढ़ती दिख रही है।
शोकेसिंग के इस समीकरण का एक बड़ा पहलू यह भी है कि देशभर के कई सिंगल-स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स प्रॉपर्टीज़ में वार 2 को प्राथमिकता देते हुए शुरुआती स्लॉट्स और स्क्रीनिंग का बड़ा हिस्सा उसे मिला। ऐसे परिदृश्य में जयपुर का राज मंदिर कुछ गिने-चुने थिएटरों में शामिल है, जिसने दोनों फिल्मों को साथ-साथ जगह दी—भले ही अनुपात असंतुलित रहा हो। यही कारण है कि कुली के समर्थक दर्शकों की भीड़ राज मंदिर जैसे प्रतिष्ठित हॉल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है और प्रबंधन को शो टाइमिंग पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित कर रही है।
बुकिंग पैटर्न से यह भी संकेत मिलता है कि टियर-2 शहरों में कुली की शुरुआती लहर मजबूत है। सुबह के शो में इतनी तेज़ बिक्री आमतौर पर तभी देखने को मिलती है जब फिल्म के प्रति “अर्ली एडॉप्टर” दर्शकों में खास उत्साह हो—और यही उत्साह बाद के शो में वर्ड-ऑफ-माउथ के ज़रिये और बड़े दर्शक वर्ग को खींच लाता है। दूसरी ओर, वार 2 को अधिक शो जरूर मिले हैं, मगर प्रति शो मांग अभी तुलनात्मक रूप से संतुलित है; ऐसे में वास्तविक तस्वीर रिलीज़ डे के वॉक-इन्स और शाम-रात के फुटफॉल से और स्पष्ट होगी।
जयपुर का राज मंदिर सिर्फ़ एक सिनेमाघर नहीं, बल्कि फिल्म देखने का एक अनुभव माना जाता है—सजीव माहौल, सेल्फी-प्वॉइंट जैसा लॉबी एरिया और बड़े परदे की रौनक। यहां का टिकट मूवमेंट अक्सर पूरे क्षेत्रीय बॉक्स ऑफिस के लिए संकेतक बनता है। यदि कुली का यह “पर-शो” मोमेंटम बना रहता है, तो संभव है कि आगे के दिनों में शो बढ़ाने का दबाव निर्माताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर और बढ़े। वहीं वार 2 के पास व्यापक शोकेसिंग का फायदा है—अगर शाम के प्राइम-टाइम में दर्शक तेजी से जुड़ते हैं, तो कुल कलेक्शन में उसका पलड़ा भारी रह सकता है।
फिलहाल, सवाल यही है कि क्या अन्य सिनेमाघर भी राज मंदिर की तरह दोनों फिल्मों को स्प्लिट-शोकेसिंग देंगे, ताकि स्थानीय मांग के मुताबिक शो समायोजित किए जा सकें? जयपुर में शुरुआती संकेत बताते हैं कि दर्शक कुली को सीमित स्क्रीनिंग के बावजूद हाथों-हाथ ले रहे हैं, और यही दबाव आने वाले दिनों में शो मैट्रिक्स बदल सकता है। कुल मिलाकर, पिंक सिटी में यह क्लैश सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस की लड़ाई नहीं, बल्कि दर्शकों की पसंद और थिएटर प्रोग्रामिंग के बीच एक दिलचस्प रस्साकशी बन चुका है।














