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राजनीति में आने के बाद बदला कंगना रनौत का नजरिया, बोलीं- अब कपड़े चुनने से भी लगने लगा डर

कंगना रनौत ने राजनीति में आने के बाद अपने बदलते नजरिए और आत्म-संदेह को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अब उन्हें सार्वजनिक छवि, पहनावे और यहां तक कि स्लीवलेस कपड़े चुनने तक में सोच-विचार करना पड़ता है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 09 Jun 2026 3:34:23

राजनीति में आने के बाद बदला कंगना रनौत का नजरिया, बोलीं- अब कपड़े चुनने से भी लगने लगा डर

अक्सर अपने बेबाक बयानों और आत्मविश्वास से भरे अंदाज के लिए चर्चा में रहने वाली कंगना रनौत ने हाल ही में अपनी निजी भावनाओं और मन में उठने वाले संदेहों को लेकर खुलकर बात की है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंगना जैसी मजबूत और मुखर शख्सियत शायद किसी भी तरह की असुरक्षा या डर महसूस नहीं करती होंगी, लेकिन अभिनेत्री और सांसद ने स्वीकार किया कि वास्तविकता इससे काफी अलग है। उन्होंने बताया कि राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनके मन में कई तरह के सवाल और आत्म-संदेह पैदा होने लगे हैं, यहां तक कि कभी-कभी पहनावे को लेकर भी वह ज्यादा सोचने लगी हैं।

खुद पर सवाल उठना स्वाभाविक है: कंगना

एक बातचीत के दौरान जब कंगना से पूछा गया कि क्या उन्हें किसी चीज का डर सताता है या फिर कभी आत्मविश्वास में कमी महसूस होती है, तो उन्होंने काफी ईमानदारी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि डर हमेशा किसी बड़े संकट या चुनौती से जुड़ा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार छोटी-छोटी बातें भी व्यक्ति के मन में असमंजस पैदा कर देती हैं।

कंगना ने कहा कि उन्हें अक्सर यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या वह किसी भूमिका के लिए पर्याप्त रूप से उपयुक्त हैं या नहीं। खासतौर पर राजनीति में कदम रखने के बाद उनके सामने कई नए सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि कई बार वह सोचती हैं कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्हें खुद को किस तरह प्रस्तुत करना चाहिए और लोगों की अपेक्षाओं पर कैसे खरा उतरना चाहिए।

पहनावे और सार्वजनिक छवि को लेकर भी रहती है चिंता


अभिनेत्री ने कहा कि राजनीति में आने के बाद उनकी सार्वजनिक छवि को लेकर जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। ऐसे में कई बार उन्हें यह भी सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि कहीं उनका व्यक्तित्व जरूरत से ज्यादा फिल्मी तो नहीं लग रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी उनके मन में यह सवाल भी आता है कि क्या बहुत ज्यादा तैयार होकर सार्वजनिक मंचों पर जाना उचित है या नहीं।

कंगना ने कहा कि यहां तक कि स्लीवलेस कपड़े पहनने जैसी सामान्य बातों को लेकर भी वह कई बार सोचती हैं। उन्हें यह चिंता रहती है कि लोग उनके पहनावे और व्यवहार को किस नजरिए से देखेंगे। उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में हर कदम पर लोगों की नजर रहती है, इसलिए छोटी-छोटी चीजें भी विचार का विषय बन जाती हैं।

नए क्षेत्र में आने पर बढ़ जाते हैं सवाल

कंगना का मानना है कि जब कोई व्यक्ति किसी नए क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके मन में कई तरह की अनिश्चितताएं पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। राजनीति उनके लिए एक नया अनुभव है और इस वजह से उन्हें रोजाना कई प्रकार के आत्म-संदेहों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि कोई एक डर हमेशा उनके साथ रहता हो, बल्कि हर दिन परिस्थितियों के अनुसार नए सवाल सामने आते रहते हैं। उनके मुताबिक नई जिम्मेदारियों और नई भूमिका में खुद को ढालना एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें सीखने के साथ-साथ आत्ममंथन भी शामिल होता है।

रिश्तों को लेकर भी दी थी खास सलाह

हाल ही में अपनी फिल्म के प्रचार के दौरान कंगना रनौत ने रिश्तों और प्रेम को लेकर भी अपनी राय साझा की थी। उन्होंने युवाओं को सलाह देते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली चमक-दमक और दिखावटी रोमांस को वास्तविक जीवन का पैमाना नहीं बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर प्रेम को एक खास अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है, जहां बड़े-बड़े सरप्राइज, घुटनों के बल बैठकर प्रपोज करना और भव्य इजहार जैसी चीजें दिखाई जाती हैं। लेकिन वास्तविक जीवन में रिश्तों की मजबूती इन दिखावों से नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और विश्वास से तय होती है। कंगना ने लोगों से अपने जीवन के सच्चे प्रेम को पहचानने और दिखावे से प्रभावित न होने की सलाह दी।

नई फिल्म को लेकर चर्चा में हैं कंगना

वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना इन दिनों अपनी आगामी फिल्म भारत भाग्य विधाता को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेत्री फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं और लगातार विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं। यह फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

फिल्म में कंगना एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं और इसकी कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। कथानक 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल में घटित घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने बेहद चुनौतीपूर्ण हालात में साहस, सूझबूझ और मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए कई लोगों की जान बचाई थी।

कंगना का किरदार भी उन बहादुर स्वास्थ्यकर्मियों में से एक का है, जो खतरे के माहौल के बीच अपने मरीजों की सुरक्षा के लिए डटी रहती है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है और कंगना भी इसे अपने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मान रही हैं।

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