हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जितेंद्र ने अपने छह दशक से अधिक लंबे करियर में अभिनय के दम पर खास पहचान बनाई है। 200 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता ने 'गीत गाया पत्थरों ने' से फिल्मी सफर शुरू किया था, जबकि 'फर्ज' ने उन्हें स्टारडम की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पर्दे पर अपनी ऊर्जा और डांसिंग स्टाइल की वजह से उन्हें 'जंपिंग जैक' के नाम से भी जाना गया। हालांकि, अभिनय के अलावा उन्होंने रियल एस्टेट में भी दूरदर्शिता दिखाते हुए ऐसे निवेश किए, जिन्होंने समय के साथ उन्हें बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाया। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई के पाली हिल स्थित अपने मशहूर बंगले की कहानी साझा की, जिसे उन्होंने बेहद कम कीमत में खरीदा था और जिसकी मौजूदा कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जा रही है।
आर्थिक तंगी में भरत भूषण ने बेचा था बंगला
'द रियल्टी ड्राइव' को दिए इंटरव्यू में जितेंद्र ने बताया कि दिवंगत अभिनेता भरत भूषण उस दौर में गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। मजबूरी में उन्हें मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल स्थित अपना बंगला बेचने का फैसला करना पड़ा। जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने यह बंगला मात्र 4.25 लाख रुपये में खरीदा था, जबकि आज उसी प्रॉपर्टी की अनुमानित कीमत करीब 450 करोड़ रुपये बताई जाती है।
पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि उस समय भरत भूषण अपने दौर के बड़े सितारों में गिने जाते थे और 'बैजू बावरा' जैसी यादगार फिल्मों में काम कर चुके थे। उन्होंने बताया कि जब भरत भूषण ने उन्हें यह बंगला खरीदने का प्रस्ताव दिया, तो उन्होंने अपने पिता से इस बारे में चर्चा की। पिता की सहमति मिलने के बाद उन्होंने यह सौदा कर लिया। जितेंद्र ने कहा कि उस समय उनका परिवार बेहद साधारण परिस्थितियों में रहता था। वे एक छोटे से 20×10 फीट के कमरे में रहते थे, जहां चॉल में आठ लोग एक साथ गुजारा करते थे। ऐसे में पाली हिल में बंगला खरीदना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने बताया कि 4.25 लाख रुपये में उन्हें न केवल बंगला मिला, बल्कि लगभग 3,450 वर्गफुट का प्लॉट भी उसी कीमत में शामिल था।
शुरुआती दौर में लगा था गलत फैसला कर लिया
जितेंद्र ने इंटरव्यू में बताया कि बंगला खरीदने के कुछ समय बाद उनके करियर में कठिन दौर शुरू हो गया। लगातार उनकी चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। उस समय उन्हें डर सताने लगा कि कहीं उनका भविष्य भी भरत भूषण की तरह आर्थिक परेशानियों में न घिर जाए। इसी चिंता के कारण उन्होंने उस घर को छोड़ने का फैसला भी कर लिया था।
हालांकि, समय के साथ परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं और वही प्रॉपर्टी उनके जीवन के सबसे सफल निवेशों में शामिल हो गई। वर्षों बाद जब एक डेवलपर उनके पास इस बंगले के रीडेवलपमेंट का प्रस्ताव लेकर पहुंचा, तो उन्होंने बिना ज्यादा देर किए उस योजना को स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्हें इस निवेश से उम्मीद से कहीं ज्यादा लाभ मिला।
सिर्फ लकड़ी से ही खरीद कीमत से कई गुना ज्यादा कमाई
जितेंद्र ने बताया कि जब बंगले को रीडेवलपमेंट के लिए तोड़ा गया, तब उसमें इस्तेमाल हुई बर्मा टीक की लकड़ी की भी अच्छी कीमत मिली। अभिनेता ने कहा कि उन्हें केवल उस लकड़ी की बिक्री से ही करीब 11.5 लाख रुपये प्राप्त हुए, जो बंगला खरीदने में खर्च की गई पूरी रकम से लगभग तीन गुना अधिक थे।
उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्होंने पूरा बंगला 4.25 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन बाद में सिर्फ निर्माण में इस्तेमाल हुई बर्मा टीक की लकड़ी से ही 11.5 लाख रुपये की कमाई हो गई। जितेंद्र के मुताबिक, यह उनके जीवन के सबसे समझदारी भरे निवेशों में से एक साबित हुआ, जिसकी कीमत समय के साथ कई सौ गुना बढ़ गई।













