NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि प्रदर्शन में सबसे अधिक चोटें छात्रों और प्रदर्शनकारियों को लगीं, जबकि अधिकांश पुलिसकर्मियों को केवल मामूली चोटें आई थीं। CJP ने दावा किया कि लगभग 99 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को गंभीर नहीं बल्कि सामान्य प्रकार की चोटें लगीं। साथ ही आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों, महिलाओं और बच्चों के साथ बलपूर्वक व्यवहार किया, जिसके कारण हालात बिगड़े।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने NDTV के साथ एक इंटरव्यू में आंदोलन की मौजूदा स्थिति, पुलिस कार्रवाई, संगठन की मांगों और सोनम वांगचुक के अनशन जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। गौरतलब है कि 20 जुलाई को CJP ने संसद तक मार्च निकालने का आह्वान किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें सामने आईं। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ की ओर से पथराव और हिंसा की गई, जिसमें 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
पुलिस के घायल होने के दावे पर क्या बोली CJP?
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि 20 जुलाई की झड़प में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों से बातचीत की थी। उनके अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि लगभग 98 से 99 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को केवल सॉफ्ट टिश्यू इंजरी यानी सामान्य ऊतकों से जुड़ी मामूली चोटें आई थीं।
सौरव दास ने कहा कि जब किसी को धक्का दिया जाता है तो इस तरह की चोटें लगना असामान्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलिसकर्मी मामूली चोटों के बावजूद बड़े-बड़े बैंडेज लगाकर पेश किए जा रहे हैं। हालांकि, यह CJP की ओर से किया गया दावा है।
छात्रों और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का लगाया आरोप
CJP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर मौजूद कई वीडियो में प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर की गई सख्ती देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ वीडियो में छात्रों के सिर और पैरों में गंभीर चोटें दिखाई देती हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों के साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया।
सौरव दास का कहना था कि जंतर-मंतर पर मौजूद कई घायल प्रदर्शनकारियों की स्थिति गंभीर थी और पुलिस को इन आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनकारियों के साथ हुई कथित ज्यादती की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
CJP ने दोहराईं अपनी प्रमुख मांगें
इंटरव्यू के दौरान पार्टी के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से संगठन अपनी दो प्रमुख मांगों पर कायम है। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है, जबकि दूसरी मांग NEET पेपर लीक मामले के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है।
उन्होंने बताया कि अब आंदोलन से जुड़ी एक और मांग भी सामने आई है। CJP चाहता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न की जाए और उन पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
सोनम वांगचुक के अनशन पर भी रखी राय
सोनम वांगचुक द्वारा सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त करने की इच्छा जताने संबंधी सवाल पर सौरव दास ने कहा कि CJP उनके संघर्ष और योगदान का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि संगठन वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और चाहता है कि उनकी सेहत सुरक्षित रहे।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि CJP का आंदोलन खत्म हो जाएगा। उनके अनुसार, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित संगठन की अन्य प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।













