पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर भरोसा दिलाती है और आंदोलन से जुड़े युवाओं के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन देती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। यह पत्र केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम लिखा गया है।
अपने पत्र में वांगचुक ने अस्पताल में मुलाकात करने और अनशन समाप्त करने की अपील के लिए दोनों केंद्रीय मंत्रियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि बातचीत के दौरान उन्हें यह भरोसा दिया गया कि सरकार उनकी बातों पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार करेगी। इसी आधार पर उन्होंने अपनी शर्तों और अपेक्षाओं को औपचारिक रूप से सरकार के सामने रखा है।
सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
सोनम वांगचुक ने पत्र में कहा कि पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए संसद में गंभीर और सार्थक चर्चा कराने की मांग दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि इस चर्चा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि 20 जुलाई 2026 को आयोजित 'चलो संसद' मार्च पुलिस की कथित सख्ती और अत्यधिक बल प्रयोग के बावजूद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उनके अनुसार देश और दुनिया ने देखा कि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक मूल्यों और शांतिपूर्ण विरोध के प्रति कितने प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस भरोसे को किसी भी कानूनी कार्रवाई, उत्पीड़न या प्रतिशोधात्मक कदम के जरिए कमजोर नहीं किया जाएगा।
'मैं जीना चाहता हूं, लेकिन युवाओं के साथ समझौता नहीं कर सकता'
वांगचुक ने पत्र में लिखा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों का समर्थन मिला है। कई सांसद उनसे मुलाकात कर चुके हैं, जबकि अन्य के आने की भी संभावना है। सभी ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।
उन्होंने लिखा, "मैं भी मानता हूं कि मुझे अभी देश के लिए बहुत काम करना है। मैं जीना चाहता हूं, अपने छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं और शिक्षा के क्षेत्र में अपना काम आगे बढ़ाना चाहता हूं। लेकिन यह सब उन युवाओं की कीमत पर नहीं हो सकता, जिनके भविष्य और अधिकारों के लिए यह आंदोलन शुरू किया गया है।"
युवाओं पर कार्रवाई न करने का मांगा भरोसा
सोनम वांगचुक ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में कोई दंडात्मक या बदले की भावना से प्रेरित कानूनी कार्रवाई नहीं की जाए। उनका कहना है कि इन युवाओं का एकमात्र उद्देश्य एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाना है।
उन्होंने लिखा कि यदि सरकार इस संबंध में स्पष्ट और सार्वजनिक आश्वासन देती है, तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उनका कहना है कि ऐसा कदम इस बात का संकेत होगा कि सरकार ने केवल उनकी अपील ही नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं की भावनाओं और उम्मीदों को भी गंभीरता से समझा है।
आश्वासन नहीं मिला तो जारी रहेगा अनिश्चितकालीन अनशन
वांगचुक ने अपने पत्र में साफ किया कि यदि सरकार की ओर से ऐसा भरोसा नहीं मिलता, तो उनके पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि आंदोलन को समाप्त कराने के लिए पुलिस की ओर से आगे किसी तरह के अतिरिक्त बल प्रयोग या सख्ती का सहारा नहीं लिया जाएगा।
पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत इस बात से तय होती है कि वह अपने असहमत नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के साथ कैसा व्यवहार करता है। उनके मुताबिक जब युवा साहस, उम्मीद और लोकतांत्रिक विश्वास के साथ अपनी आवाज उठाते हैं, तब उनकी बात सुनना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।













