करीब 14 साल पहले रिलीज हुई सैफ अली खान और करीना कपूर स्टारर फिल्म 'एजेंट विनोद' एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस बार चर्चा की वजह फिल्म की कहानी या इसके एक्शन सीक्वेंस नहीं, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ा एक नया खुलासा है। फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता और लेखक ललित परिमू ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म के फ्लॉप होने की वजहों पर विस्तार से बात की और कई ऐसे दावे किए, जिन्होंने फिल्मी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
ललित परिमू का मानना है कि फिल्म की असफलता के पीछे सिर्फ बॉक्स ऑफिस की परिस्थितियां जिम्मेदार नहीं थीं, बल्कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुई कुछ ऐसी बातें भी थीं, जिन्होंने निर्देशक के मूल विजन को प्रभावित किया। उनके अनुसार, फिल्म जिस दिशा में आगे बढ़नी चाहिए थी, वह रास्ता बीच में ही बदल गया था।
'निर्देशक की सोच के मुताबिक नहीं बन पाई फिल्म'
सिद्धार्थ कनन को दिए गए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि आखिर 'एजेंट विनोद' दर्शकों की उम्मीदों पर क्यों खरी नहीं उतर पाई, तो उन्होंने बिना झिझक अपनी राय रखी। ललित ने कहा कि उनकी नजर में सबसे बड़ी समस्या फिल्म में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप था।
उन्होंने दावा किया कि सैफ अली खान और करीना कपूर की ओर से फिल्म की प्रक्रिया में काफी दखल दिया जा रहा था। उनके मुताबिक, इस वजह से निर्देशक श्रीराम राघवन अपनी कल्पना और सोच के अनुसार फिल्म को पूरी तरह आकार नहीं दे सके। ललित का कहना था कि लगातार यह बताया जाता था कि क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं, जिससे रचनात्मक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
उनके अनुसार, जब किसी फिल्म के निर्माण में कई दिशाओं से सुझाव और दबाव आने लगते हैं, तो कहानी, लेखन और निर्देशन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। उनका मानना है कि 'एजेंट विनोद' के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और इसका असर अंतिम परिणाम पर दिखाई दिया।
'फिल्म निर्देशक की होती है, स्टार की नहीं'
बातचीत के दौरान ललित परिमू ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वे 1990 के दशक से श्रीराम राघवन के साथ काम करते आ रहे हैं और उनकी कार्यशैली को अच्छी तरह समझते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म का असली कप्तान उसका निर्देशक होता है। यदि निर्देशक के पास किसी कहानी को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण है, तो पूरी टीम को उसका सम्मान करना चाहिए। ललित ने यह भी माना कि कलाकारों के सुझाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं और यदि कोई सुझाव कहानी या फिल्म के लिए बेहतर साबित हो, तो निर्देशक उसे स्वीकार भी कर सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सुझाव रचनात्मक जरूरत की बजाय स्टारडम के प्रभाव में दिए जाएं, तो वे फिल्म के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। उनके मुताबिक, कई बार यही स्थिति किसी प्रोजेक्ट को कमजोर कर देती है और उसका असर सीधे फिल्म की गुणवत्ता पर पड़ता है।
श्रीराम राघवन ने भी मानी थी अपनी गलती
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन भी 'एजेंट विनोद' को लेकर आत्ममंथन कर चुके हैं। गैलाटा प्लस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि फिल्म को लेकर उनसे भी कुछ गलतियां हुई थीं।
राघवन ने कहा था कि उनकी सबसे बड़ी भूल यह थी कि उन्होंने कहानी की मजबूती की तुलना में सीक्वेंस और स्टाइल पर ज्यादा भरोसा कर लिया। उनके अनुसार, फिल्म में कई आकर्षक दृश्य और एक्शन ब्लॉक थे, लेकिन कहानी उतनी प्रभावी नहीं बन सकी, जितनी होनी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि जिस फिल्म को एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव बनना चाहिए था, वह कहीं न कहीं उलझनों में फंस गई। हालांकि निर्देशक ने यह भी माना कि आज भी फिल्म के कुछ हिस्से और दृश्य उन्हें बेहद पसंद हैं और उन्हें देखकर उन्हें संतोष मिलता है।
2012 में रिलीज हुई थी फिल्म
गौरतलब है कि 'एजेंट विनोद' साल 2012 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में सैफ अली खान ने एक रॉ एजेंट की भूमिका निभाई थी, जबकि करीना कपूर एक आईएसआई एजेंट के किरदार में नजर आई थीं। उस समय फिल्म को लेकर काफी उम्मीदें थीं और इसके एक्शन, लोकेशंस तथा स्टाइलिश प्रस्तुति की भी चर्चा हुई थी।
हालांकि रिलीज के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी और इसे व्यावसायिक रूप से असफल माना गया। इसके बावजूद समय के साथ एक वर्ग ऐसा भी रहा जिसने फिल्म की जासूसी दुनिया, कुछ दमदार सीक्वेंस और इसके अलग अंदाज की सराहना की। आज भी कई दर्शक इसे एक महत्वाकांक्षी लेकिन अधूरी संभावनाओं वाली फिल्म के रूप में याद करते हैं।













