
सावन माह का आगमन हर शिवभक्त के हृदय में भक्ति की लहरें जगा देता है। यह महीना स्वयं में पवित्रता, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक होता है। विशेष रूप से सावन की शिवरात्रि का दिन तो हर भक्त के लिए एक अद्भुत आध्यात्मिक अवसर लेकर आता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल चढ़ाना अत्यंत शुभ व फलदायी माना जाता है। यह दिन शिवभक्तों के लिए ऐसा सुनहरा अवसर होता है, जब वे भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए रात्रि जागरण करते हैं और चार प्रहर की पूजा में भाग लेते हैं। लेकिन इस बार, कुछ अलग भी है — इस वर्ष सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया भी पड़ेगा, जिससे पूजा का सही मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
इस साल कब है सावन शिवरात्रि?
सावन शिवरात्रि इस बार 23 जुलाई को पड़ रही है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। यही कारण है कि इस दिन का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी अत्यधिक गहराई लिए होता है।
भद्रा का समय – कब रहें सावधान?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा काल शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इस बार भद्रा सुबह 05:37 से दोपहर 03:31 बजे तक रहेगी। अतः इस समयावधि में शिव पूजन व जलाभिषेक करने से बचना चाहिए। श्रद्धालु इस समय का विशेष ध्यान रखें ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके।
जानें जलाभिषेक के सर्वोत्तम मुहूर्त
सावन शिवरात्रि के दिन विभिन्न मुहूर्तों में जलाभिषेक और पूजा करने का विशेष महत्व होता है।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 से 04:56 तक – यह मुहूर्त मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सर्वोत्तम समय होता है।
अमृत काल: सुबह 08:32 से 10:02 तक – इस काल में शिवलिंग पर जल अर्पित करना पुण्यकारी माना गया है।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 से 03:39 तक – यह समय जीवन में विजय और सफलता के लिए श्रेष्ठ होता है।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 से 07:38 तक – यह काल वातावरण में सौम्यता और शांति लेकर आता है, जिससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
रात्रि के चार प्रहरों में शिव पूजन: हर प्रहर का महत्व
शिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में पूजा करने की परंपरा रही है। ऐसा माना जाता है कि चारों प्रहर में पूजा करने से शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त को संपूर्ण जीवन में सुख, शांति और सफलता का आशीर्वाद देते हैं।
प्रथम प्रहर: शाम 07:17 से रात 09:53 तक — दिन भर की थकान के बाद यह पूजा मन को शांति देती है।
द्वितीय प्रहर: रात 09:53 से 12:28 तक — इस समय शिवलिंग पर जल चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
तृतीय प्रहर: रात 12:28 से सुबह 03:03 तक — यह समय अत्यंत शक्तिशाली और तपस्वियों का प्रिय होता है।
चतुर्थ प्रहर: सुबह 03:03 से 05:38 तक — यह प्रहर जीवन की नई शुरुआत का संकेत देता है।
निशिता काल पूजा – ब्रह्मा और विष्णु भी करते हैं वंदना
सावन शिवरात्रि पर निशिता काल का भी विशेष महत्व होता है। यह काल रात 12:07 से 12:48 तक रहेगा। यह वही समय होता है जब शिवजी स्वयं ध्यानस्थ होते हैं और भक्तों की प्रार्थनाओं को सहजता से स्वीकार करते हैं।














