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मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने बनाई रणनीति, परिसीमन बिल का विरोध करने का किया ऐलान

मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने परिसीमन बिल का विरोध करने का ऐलान किया है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन नेशन, वन इलेक्शन, FCRA और अन्य विधेयकों पर भी रणनीति बनाई गई।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 16 Jul 2026 2:54:19

मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने बनाई रणनीति, परिसीमन बिल का विरोध करने का किया ऐलान

संसद का मानसून सत्र आगामी सोमवार से शुरू होने जा रहा है और उससे पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार सरकार की ओर से संसद में तीन संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी सिलसिले में गुरुवार को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर कांग्रेस संसदीय दल की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने की, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि संसद में परिसीमन विधेयक लाया जाता है तो पार्टी उसका विरोध करेगी।

परिसीमन विधेयक पर सरकार को घेरने की तैयारी

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि सरकार मानसून सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव का संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विरोध करेगी तथा इस मुद्दे पर समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति अपनाएगी।

उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरे मानसून सत्र की संसदीय रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि सरकार की ओर से अब तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि सत्र में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे। जयराम रमेश ने उम्मीद जताई कि रविवार को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी दे सकती है।

सर्वदलीय बैठक पर भी उठाए सवाल

जयराम रमेश ने सर्वदलीय बैठक की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकों में कई राजनीतिक दल अपनी राय रखते हैं, लेकिन अंतिम फैसला कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा लिया जाता है। उनके अनुसार सरकार विपक्ष की राय पर गंभीरता से विचार नहीं करती और निर्णय पहले से तय होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को आशंका है कि सरकार एक बार फिर परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। उनका दावा था कि इससे पहले 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में विपक्ष इस बार भी एकजुट होकर सरकार का सामना करेगा।

कई अन्य विधेयकों का भी करेगी विरोध

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि मानसून सत्र में आने वाले कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों का भी विरोध किया जाएगा। जयराम रमेश ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में जिस विधेयक का विपक्ष पहले ही बहिष्कार कर चुका है, उसे लेकर भी कांग्रेस का रुख पहले जैसा रहेगा। इस विधेयक में सांसदों, विधायकों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के कार्यकाल से जुड़े प्रावधानों पर विपक्ष ने पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी।

उन्होंने बताया कि पार्टी 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़े प्रस्ताव, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में किए जाने वाले बदलावों का भी विरोध करेगी। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी विषयों पर पार्टी का रुख स्पष्ट है और फिलहाल किसी भी प्रस्तावित विधेयक का समर्थन करने की संभावना नहीं दिख रही है।

बैठक में जुटे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता


कांग्रेस संसदीय दल की इस महत्वपूर्ण बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा के.सी. वेणुगोपाल, शशि थरूर, पी. चिदंबरम, कुमारी शैलजा, मनीष तिवारी सहित पार्टी के कई सांसद मौजूद रहे। बैठक में मानसून सत्र के दौरान सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और विपक्षी दलों के साथ तालमेल बनाए रखने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

परिसीमन विधेयक को लेकर कांग्रेस की विशेष तैयारी

बैठक में सबसे अधिक चर्चा परिसीमन विधेयक को लेकर हुई। कांग्रेस का मानना है कि पिछली बार पार्टी इस विधेयक को आगे बढ़ने से रोकने में सफल रही थी, लेकिन इस बार लोकसभा की राजनीतिक स्थिति पहले से अलग है। ऐसे में पार्टी इस मुद्दे पर पहले से अधिक तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विषय पर वरिष्ठ मंत्रियों और सहयोगियों के साथ विस्तृत चर्चा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास पर हाल ही में करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इसके बाद कांग्रेस की रणनीतिक बैठक ने इस मुद्दे को और राजनीतिक महत्व दे दिया है।

क्या सरकार के पास पर्याप्त समर्थन है?

परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को संविधान संशोधन के तहत आवश्यक बहुमत जुटाना होगा। राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो सरकार के पास पहले से बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन है और वह सहयोगी दलों के साथ लगातार संपर्क में है।

चर्चा यह भी है कि यदि विधेयक में कुछ विशेष प्रावधान शामिल किए जाते हैं तो कुछ क्षेत्रीय दल भी सरकार का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में सरकार के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाकर सरकार को चुनौती देने की तैयारी में हैं, जिससे मानसून सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में से एक बन सकता है।

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