अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रहा संघर्ष अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की शर्त स्वीकार कर ली है, जो इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा था। हालांकि दूसरी ओर ईरान ने उनके दावे से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
दोनों देशों की ओर से आए विरोधाभासी बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ ट्रंप युद्ध समाप्त होने की बात कर रहे हैं, वहीं तेहरान का कहना है कि वार्ता अभी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वास्तव में बातचीत किस चरण में है और क्या दोनों पक्ष किसी ठोस सहमति के करीब पहुंच पाए हैं।
ट्रंप ने वर्चुअल सभा में किया बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने एक वर्चुअल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “शायद आपने यह खबर सुनी होगी कि आज हमने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है। उन्होंने यह स्वीकार कर लिया है कि वे कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेंगे। हमारी सबसे बड़ी शर्त यही थी और यही इस पूरे संघर्ष का मूल उद्देश्य भी था।”
ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच विवाद का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा हुआ था। उनका कहना था कि जब इस मुद्दे पर सहमति बन गई तो संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता भी साफ हो गया।
इस बयान से कुछ समय पहले ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित आगे की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का फैसला किया था। इसके साथ ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी संकेत दिए थे कि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की सहमति बन चुकी है। हालांकि उन्होंने समझौते की शर्तों या उसके स्वरूप के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
समझौता होने के संकेत, लेकिन नाकेबंदी जारी
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी निगरानी और नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक संभावित समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका स्वयं भी इस प्रक्रिया को अभी पूरी तरह संपन्न नहीं मान रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वास्तव में कोई प्रारंभिक सहमति बनी भी है, तो उसे लागू करने और औपचारिक रूप देने में अभी समय लग सकता है। यही वजह है कि कई स्तरों पर सावधानी बरती जा रही है।
ईरान ने दावों को बताया अटकल
उधर ईरान ने ट्रंप के दावों की पुष्टि करने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी IRNA से बातचीत में कहा कि अमेरिका के साथ किसी अंतिम समझौते की खबरें फिलहाल केवल अटकलों पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि तेहरान ने अभी तक किसी भी समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दी है और न ही इस संबंध में कोई निर्णायक फैसला लिया गया है। उनके अनुसार वार्ता की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसे किसी निष्कर्ष तक पहुंचा हुआ मानना जल्दबाजी होगी।
मध्यस्थ देशों की भूमिका पर भी दिया बयान
इस्माइल बघाई ने बताया कि कतर और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और मध्यस्थ के तौर पर सक्रिय हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की बदलती रणनीति और उसके हालिया कदम कूटनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।
IRNA के मुताबिक, बघाई ने कहा कि बातचीत के दौरान ईरान की स्थिति शुरू से स्पष्ट रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के मसौदे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष समय-समय पर अपना रुख बदलता रहा, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई।
‘रेड लाइन्स’ पर समझौता नहीं करेगा ईरान
ईरानी प्रवक्ता ने दोहराया कि तेहरान अपनी प्रमुख शर्तों और राष्ट्रीय हितों को लेकर कोई समझौता करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान ने वार्ता के दौरान बार-बार यह साबित किया है कि वह अपनी तथाकथित ‘रेड लाइन्स’ यानी अहम शर्तों से पीछे हटने वाला नहीं है।
बघाई के अनुसार, अभी तक बातचीत के बावजूद किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। ऐसे में अमेरिका की ओर से युद्ध समाप्त होने या समझौता हो जाने के दावों को ईरान आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करता। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में किसी औपचारिक समझौते की घोषणा होती है।














