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जानिए कौन हैं मोजतबा खामेनेई? ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, इजरायल पर दागी गईं ताबड़तोड़ मिसाइलें

अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान को नया सुप्रीम लीडर मिल गया है। जानिए कौन हैं मोजतबा खामेनेई, उनका राजनीतिक और सैन्य सफर, और क्यों उनके सत्ता में आने से अमेरिका-इजरायल के साथ तनाव बढ़ गया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 09 Mar 2026 11:08:24

जानिए कौन हैं मोजतबा खामेनेई? ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, इजरायल पर दागी गईं ताबड़तोड़ मिसाइलें

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद मध्य पूर्व में तनाव और भी बढ़ गया है। उनके निधन के बावजूद अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई लगातार जारी बताई जा रही है। इसी बीच ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव सामने आया है।

ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया है। 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को भी अपने पिता की तरह एक कट्टरपंथी इस्लामी धर्मगुरु माना जाता है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सबसे प्रभावशाली होता है। यह पद राष्ट्रपति से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है और देश की राजनीति, सेना, विदेश नीति और न्याय व्यवस्था से जुड़े अंतिम निर्णय इसी पद के हाथ में होते हैं।

किस तरह मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर

बताया जाता है कि मोजतबा खामेनेई का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ काफी मजबूत संबंध रहा है। अली खामेनेई के निधन के बाद से ही यह चर्चा तेज हो गई थी कि सुप्रीम लीडर के पद के लिए मोजतबा का नाम सबसे आगे चल रहा है।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद देश में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। हालांकि ईरान की आधिकारिक विचारधारा में वंशानुगत उत्तराधिकार को पसंद नहीं किया जाता, लेकिन मोजतबा के पास अपने पिता के प्रभावशाली नेटवर्क और IRGC के भीतर मजबूत समर्थन मौजूद था। इसी कारण अंततः उन्हें सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

बचपन और सैन्य पृष्ठभूमि

मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उनका जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। उस समय ईरान में शाह का शासन था और 1979 की इस्लामी क्रांति आने में अभी लगभग एक दशक का समय बाकी था।

कम उम्र से ही मोजतबा धार्मिक शिक्षा और राजनीतिक माहौल के बीच पले-बढ़े। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1987 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में प्रवेश किया। ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) के अंतिम चरण में उन्होंने सैन्य सेवा भी दी।

इसके एक साल बाद 1989 में उनके पिता अली खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति उस समय हुई थी जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रुहोल्लाह खुमैनी का निधन हो गया था।

चुनावी राजनीति में दखल देने के आरोप

मोजतबा खामेनेई का नाम ईरान की राजनीति में पहले भी कई बार चर्चा में आ चुका है। खासकर 2005 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जब रूढ़िवादी नेता महमूद अहमदीनेजाद सत्ता में आए थे।

उस समय कई सुधारवादी नेताओं ने आरोप लगाया था कि मोजतबा ने धार्मिक नेताओं और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ मिलकर अहमदीनेजाद की जीत सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई थी। सुधारवादी नेता मेहदी कर्रूबी ने तो यहां तक आरोप लगाया था कि “एक उस्ताद का बेटा” चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है।

हालांकि इन आरोपों का अली खामेनेई ने खुलकर बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि उनका बेटा सिर्फ “किसी उस्ताद का बेटा” नहीं बल्कि खुद भी एक सक्षम उस्ताद है।

अली खामेनेई के बाद कौन संभाल रहा था सत्ता


अली खामेनेई के निधन के तुरंत बाद ईरान में सत्ता का पूरा नियंत्रण किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं था। देश की सर्वोच्च जिम्मेदारी अस्थायी तौर पर तीन सदस्यों की एक अंतरिम परिषद संभाल रही थी।

इस परिषद में अंतरिम सुप्रीम लीडर अलीरेजा अराफी, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और ईरान के मुख्य न्यायाधीश गुलाम होसैन मोहसेनी-एजेई शामिल थे। यह परिषद देश के प्रमुख फैसले लेने की जिम्मेदारी निभा रही थी, जब तक कि नया स्थायी सुप्रीम लीडर तय नहीं हो जाता।

पहले से ही लगने लगे थे कयास


मोजतबा खामेनेई के नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले ही संकेत मिलने लगे थे कि सत्ता की बागडोर उनके हाथों में जा सकती है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के 88 सदस्यों में से एक सदस्य एशकेवारी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि खामेनेई का नाम आगे भी कायम रहेगा।

उन्होंने यह भी बताया था कि सुप्रीम लीडर के चयन के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही परिणाम सार्वजनिक किए जाएंगे। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह अनुमान लगाया जाने लगा था कि मोजतबा के नाम पर अंतिम मुहर लग चुकी है।

अमेरिका और इजरायल की कड़ी चेतावनी

नए सुप्रीम लीडर के चयन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायल और अमेरिका दोनों ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो नए सुप्रीम लीडर को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चयन में उनकी भूमिका होनी चाहिए।

हालांकि ईरान ने इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया था। रविवार को ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि “ईरान का अगला सुप्रीम लीडर मेरी मंजूरी के बिना ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।”

इन घटनाओं के बीच मोजतबा खामेनेई का सत्ता में आना मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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