
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच लड़ाकू विमानों को लेकर सामने आई घटनाओं ने पूरे वैश्विक परिदृश्य को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों देशों के बीच टकराव अब सीधे सैन्य स्तर तक पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक अत्याधुनिक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को निशाना बनाकर गिरा दिया। इस दावे के बाद अमेरिका की ओर से पुष्टि की गई कि विमान में मौजूद दो क्रू मेंबर्स में से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है और उसकी तलाश जारी है।
इसी क्रम में ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के A-10 वार्थोग जेट को भी मार गिराया। हालांकि, इस घटना को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से सीमित जानकारी सामने आई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इन घटनाओं के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई, जब ईरान ने बचाव अभियान में जुटे अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया। बताया गया कि लापता चालक दल के सदस्य की तलाश में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर हमला किया गया, हालांकि वे किसी तरह सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर व्हाइट हाउस भी सक्रिय नजर आया। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्थिति की पूरी जानकारी दे दी गई है। बाद में ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि इन सैन्य घटनाओं का किसी संभावित बातचीत या रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे युद्ध की स्थिति बताते हुए कहा कि ऐसे नुकसान इस तरह के टकराव का हिस्सा होते हैं।
अब बात करें अमेरिका के F-15E स्ट्राइक ईगल की ताकत और क्षमताओं की, तो यह विमान दुनिया के सबसे शक्तिशाली मल्टी-रोल फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सके।
F-15 कार्यक्रम की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, जब इसका पहला वर्जन F-15A 1972 में उड़ान भरने में सफल रहा। इसके बाद इसके कई उन्नत वर्जन विकसित किए गए, जिनमें F-15B, F-15C और F-15D शामिल हैं। अंततः इसका आधुनिक और अधिक सक्षम संस्करण F-15E सामने आया, जिसे 1988 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया।
इस विमान की सबसे बड़ी खासियत इसका शक्तिशाली इंजन और उच्च थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात है, जो इसे बेहद तेज गति से ऊपर उठने और हवा में तेज़ी से maneuver करने की क्षमता देता है। यह जेट बिना गति खोए तीखे मोड़ लेने में सक्षम है, जो इसे हवाई युद्ध में बेहद घातक बनाता है।
F-15E की अधिकतम रफ्तार लगभग 1,875 मील प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि यह 60,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। हथियारों के मामले में भी यह बेहद ताकतवर है—यह विभिन्न प्रकार की मिसाइलें ले जाने के साथ-साथ 20 मिमी की तोप से लैस होता है, जिसमें लगभग 500 राउंड गोला-बारूद मौजूद रहता है।
इसकी दो-सीटर संरचना भी इसे खास बनाती है। आगे की सीट पर पायलट विमान को नियंत्रित करता है, जबकि पीछे बैठा वेपन सिस्टम ऑफिसर मिशन से जुड़े तकनीकी और हथियार संबंधी कार्यों को संभालता है। इसमें लगे आधुनिक डिस्प्ले सिस्टम और हेड-अप डिस्प्ले पायलट को बिना नीचे देखे जरूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
हर मौसम में ऑपरेशन करने की क्षमता और एक साथ कई मिशनों को अंजाम देने की ताकत के कारण F-15E स्ट्राइक ईगल अमेरिकी वायुसेना का एक बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इस तरह के विमान को लेकर सामने आए दावे और घटनाएं निश्चित रूप से वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
अमेरिका का A-10 वॉर्थोग (थंडरबोल्ट II) एक ऐसा लड़ाकू विमान है जिसे खास तौर पर युद्ध के मैदान में जमीनी सैनिकों को नजदीकी हवाई समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है। इसकी डिजाइन और क्षमता इसे तेज़ रफ्तार जेट्स जैसे F-15E से अलग बनाती है, क्योंकि यह कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में माहिर है।
A-10 की अधिकतम गति लगभग 420 मील प्रति घंटा है, जो भले ही अन्य फाइटर जेट्स से कम हो, लेकिन इसकी मजबूती और टिकाऊपन इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह दुश्मन के भारी हमलों को झेलते हुए भी मिशन जारी रख सके। यह विमान 23 मिमी तक के कवच-भेदी और उच्च-विस्फोटक हमलों को सहन करने की क्षमता रखता है, जो इसे युद्ध के मैदान में बेहद भरोसेमंद बनाता है।
इसकी सुरक्षा व्यवस्था भी काफी मजबूत है। इसके ईंधन टैंक स्व-सीलिंग तकनीक से लैस हैं, जो किसी हमले की स्थिति में आग लगने के खतरे को कम करते हैं। इसके अलावा, इसमें डबल हाइड्रोलिक कंट्रोल सिस्टम के साथ मैनुअल बैकअप भी दिया गया है, जिससे पायलट हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने पर भी विमान को सुरक्षित उड़ा और उतार सकता है।
पायलट की सुरक्षा के लिए A-10 में टाइटेनियम कवच का इस्तेमाल किया गया है, जिसे “टाइटेनियम बाथटब” भी कहा जाता है। इसके साथ ही, विमान की संरचना में कई रिडंडेंट सिस्टम दिए गए हैं, ताकि किसी हिस्से को नुकसान पहुंचने पर भी यह उड़ान भरने में सक्षम रहे। इसे रखरखाव के लिहाज से भी बेहद आसान बनाया गया है, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी इसे जल्दी तैयार किया जा सकता है।
इस विमान की सबसे खतरनाक ताकत इसकी 30 मिमी GAU-8 एवेंजर गैटलिंग गन है, जो प्रति मिनट लगभग 3,900 गोलियां दाग सकती है। यह खास तौर पर टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए बनाई गई है। खाड़ी युद्ध के दौरान इस विमान ने 8,000 से ज्यादा मिशन उड़ानें भरी थीं और लगभग 95.7 प्रतिशत की शानदार मिशन सफलता दर हासिल की थी।
अब बात करें उस दावे की, जिसमें ईरान ने अमेरिकी विमानों को मार गिराने की बात कही है। ईरान का कहना है कि उसने F-15E और A-10 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया। इन दावों के समर्थन में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए, जिनमें मलबा दिखाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है, लेकिन इससे क्षेत्र में तनाव जरूर बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में इन्फ्रारेड आधारित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रडार की जरूरत नहीं होती। यह सीधे विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी यानी हीट सिग्नेचर को ट्रैक करती है।
इन्फ्रारेड सिस्टम में लगा थर्मल सीकर आसमान में सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ने वाले हिस्से—यानी जेट इंजन—को पहचानता है और उसी पर लॉक हो जाता है। जैसे ही लक्ष्य तय होता है, मिसाइल अपने आप उसका पीछा करती है और सटीक हमला करती है। चूंकि इसमें रडार सिग्नल का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए पायलट को समय रहते चेतावनी मिलना मुश्किल हो जाता है।
बताया जा रहा है कि ईरान ने अपने स्वदेशी ‘Majid’ जैसे एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग किया होगा, जिसे खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस तरह के सिस्टम लो-फ्लाइंग टारगेट्स के खिलाफ ज्यादा प्रभावी होते हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक कितनी तेजी से बदल रही है। जहां एक ओर अत्याधुनिक फाइटर जेट्स हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे स्मार्ट मिसाइल सिस्टम भी हैं जो बिना रडार के ही उन्हें चुनौती दे सकते हैं। यही वजह है कि पश्चिम एशिया में जारी यह तनाव आने वाले समय में और भी जटिल रूप ले सकता है।













