
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अब अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। अराघची का आरोप है कि वॉशिंगटन ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन बाद की घटनाओं ने इस वादे को झूठा साबित कर दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में अराघची ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “अमेरिका के साथ संवाद का अध्याय अब खत्म हो चुका है। हमसे हमला न करने का वादा किया गया था, लेकिन जो हुआ वह सीधा-सीधा विश्वासघात है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हालिया घटनाओं ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बची-खुची कूटनीतिक संभावनाओं को भी खत्म कर दिया है।
‘बातचीत के बीच ही हमला, भरोसा टूटा’
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि जब दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुन लिया। उनके अनुसार, “हमने संवाद के जरिए समाधान की उम्मीद की थी, लेकिन अमेरिका ने वादा करके पीठ में छुरा घोंपा। अब इस रिश्ते में भरोसे की कोई गुंजाइश नहीं बची है।”
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को कूटनीति के लिए गंभीर झटका बताते हुए कहा कि इस तरह के अनुभव भविष्य में किसी भी तरह के भरोसे को कमजोर कर देते हैं। अराघची के मुताबिक, मौजूदा हालात ने दोनों देशों के बीच संवाद के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।
बढ़ता तनाव और हमलों की आशंका
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे के अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुके हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ईरान ने साफ किया है कि यदि उसके बिजली संयंत्रों पर हमला किया गया, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद और बढ़ा टकराव
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता, तो उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब और तीखा हो सकता है। कूटनीतिक रास्ते बंद होने की बात ने वैश्विक स्तर पर चिंता को और गहरा कर दिया है।














