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ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी, जानें क्यों उन्हें सौंपी गई देश की कमान

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को नया अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया। जानें उनके राजनीतिक और धार्मिक अनुभव, जिम्मेदारियाँ और क्यों उन्हें सौंपी गई देश की कमान।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 01 Mar 2026 4:27:23

ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी, जानें क्यों उन्हें सौंपी गई देश की कमान

तेहरान: अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे तनाव के बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को देश का नया अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। 1959 में याज्द प्रांत के मेयबोद शहर में जन्मे अराफी एक अनुभवी शिया धर्मगुरु हैं। वर्तमान में वे गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य होने के साथ-साथ बसिज संगठन के प्रमुख भी हैं। इससे पहले अराफी अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन, कोम के शुक्रवार इमाम और ईरान सेमिनरी के प्रमुख रह चुके हैं। ध्यान दें कि अराफी को फिलहाल अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स बाद में स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी।

अराफी ने निभाई कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ

अराफी इंटरनेशनल सेंटर फॉर इस्लामिक साइंसेज के अध्यक्ष और बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वे यूनिवर्सिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष, इमाम खुमेनी एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शैक्षणिक विभाग से जुड़े रहे हैं। कोम सेमिनरी की रिसर्च काउंसिल के सदस्य और मेयबोद शहर के शुक्रवार इमाम रह चुके अराफी सुप्रीम काउंसिल ऑफ कल्चरल रेवोल्यूशन के सदस्य भी हैं। उन्होंने ईरान सेमिनरी और अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक कार्य किए हैं।

5 करोड़ लोगों को शिया धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया

अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में अराफी का कार्यकाल खास माना जाता है। 2009 से 2018 तक इस संस्थान के प्रमुख रहे अराफी ने इस्लामिक रिपब्लिक की विचारधारा और शिया धर्म का प्रचार दुनियाभर में किया। उनका दावा है कि उन्होंने इन वर्षों में लगभग 5 करोड़ लोगों को शिया धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ईरान की नीतियों में बदलाव की संभावना

अराफी अपने कट्टर धार्मिक विचारों के लिए जाने जाते हैं। वे नास्तिकता और ईसाई धर्म के विरोधी हैं, विशेषकर ईरान में चल रहे घरेलू चर्चों के। उन्हें मूर्तिपूजा के समान मानने वाले अराफी कोम सेमिनरी की मौजूदा धार्मिक परंपराओं की आलोचना करते रहे हैं। सुप्रीम लीडर बनते ही अराफी ईरान की राजनीतिक और धार्मिक नीतियों में बड़े बदलाव ला सकते हैं और देश की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

अराफी को क्यों चुना गया नया सुप्रीम लीडर

अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर इसलिए नियुक्त किया गया क्योंकि खामनेनी की हत्या के बाद संविधान के आर्टिकल 111 के तहत अस्थायी लीडरशिप काउंसिल का गठन किया गया था। इस तीन सदस्यीय परिषद में राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल के ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल हैं। अराफी को इसी परिषद में ज्यूरिस्ट सदस्य के रूप में चुना गया और अब वे अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। खामनेनी के करीबी विश्वासपात्र रहे अराफी को नियुक्त करके जंग और तनाव के इस समय में विचारधारा की निरंतरता, प्रशासनिक क्षमता और शासन की स्थिरता सुनिश्चित की गई है।

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