
मध्य-पूर्व में तनाव अब खुली सैन्य भिड़ंत में बदलता दिखाई दे रहा है। ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जवाबी कार्रवाई को और तेज करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर को निशाना बनाया है। तेहरान का दावा है कि उसने अमेरिकी सहयोगियों को सीधी चेतावनी देने के लिए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इजरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद रणनीतिक ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और मानवरहित ड्रोन की बौछार कर दी। इस कार्रवाई को क्षेत्रीय समीकरण बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
दुबई और दोहा में धमाकों से दहला आसमान
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि दुबई और कतर की राजधानी दोहा के ऊपर देर रात कई तेज धमाकों की आवाजें गूंजीं। आसमान में रोशनी की लकीरें और धुएं के गुबार देखे गए। दोनों देश लंबे समय से अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे हैं, और ईरान की यह कार्रवाई उसी साझेदारी के खिलाफ संदेश मानी जा रही है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” के पांचवें चरण में अमेरिकी सैन्य आपूर्ति से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। संगठन का दावा है कि जेबेल अली एंकरेज पर खड़े एक जहाज, जो कथित रूप से अमेरिकी नौसैनिक बलों के लिए गोला-बारूद लेकर जा रहा था, उस पर चार ड्रोन ने हमला किया। हमले के बाद जहाज को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
मिसाइल और ड्रोन से हमला, बड़े नुकसान का दावा
IRGC के मुताबिक, कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक इलाके में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें और 12 ड्रोन दागे गए। ईरानी दावों में कहा गया है कि हमलों से बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति हुई और कई अमेरिकी सैनिक हताहत हुए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
तेहरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि IRGC की नौसेना और वायुसेना मिलकर “दुश्मन इकाइयों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खुले रखेगी।” यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है और वह अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन जारी रखेगा।
समुद्री मार्गों और एयरपोर्ट भी बने निशाना
ईरानी सूत्रों ने यह भी दावा किया कि एक MST-क्लास कॉम्बैट सपोर्ट शिप, जो हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों को ईंधन पहुंचाने के मिशन पर था, उसे लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाया गया। ईरान ने 380 मिसाइलों के इस्तेमाल का दावा किया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अन्य स्रोतों से नहीं हुई है।
इसी बीच, दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे—जो दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में गिना जाता है—को भी हमले की जद में आने की खबरें हैं। उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय युद्ध की आशंका के चलते UAE ने पहले ही अपने कई हवाई परिचालन सीमित कर दिए थे।
रणनीतिक प्रतीकों पर भी प्रहार
रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले ईरान ने दुबई के प्रतिष्ठित कृत्रिम द्वीप पाम जुमेराह और लक्जरी होटल बुर्ज अल अरब जैसे प्रतीकात्मक स्थलों को भी निशाना बनाया था। इन स्थानों पर हमलों को केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इस तनाव से सीधे प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दुनिया की नजर तेहरान, वॉशिंगटन और उनके सहयोगियों के अगले कदम पर टिकी हुई है।














