
तेहरान से आ रही ताज़ा खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर दिया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात शांत होने के बजाय और विस्फोटक हो गए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। दुबई और आसपास के क्षेत्रों में जवाबी कार्रवाई जारी रखने के बीच अमेरिका ने भी तेहरान पर नए सिरे से तीव्र हवाई हमले शुरू कर दिए। इसी उथल-पुथल के बीच यह खबर सामने आई है कि ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ की भी मौत हो गई है।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से बताया गया कि शनिवार को हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों में सशस्त्र बलों के प्रमुख अब्दुल रहीम मूसावी और रक्षा मंत्री अजीज नासिरज़ादेह मारे गए। यह घटनाक्रम ईरानी सैन्य ढांचे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले तेहरान खामेनेई, उनके करीबी सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर की मौत की पुष्टि कर चुका है।
आईआरएनए ने यह भी संकेत दिया है कि हमलों में सशस्त्र बलों के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हताहत हुए हैं। हालांकि उनके नाम तत्काल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और कहा गया है कि आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी। लगातार मिल रही इन खबरों ने देश के भीतर बेचैनी और गुस्से को और बढ़ा दिया है।
रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि राजधानी तेहरान में कई शक्तिशाली धमाकों की आवाजें सुनी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शहर के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुएं के गुबार उठते देखे गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब इजरायल ने हमलों की एक नई लहर शुरू करने की घोषणा की थी।
इजरायली सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसने रविवार सुबह ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया है। सेना का दावा है कि ये हमले रणनीतिक ठिकानों पर केंद्रित थे, ताकि संभावित जवाबी कार्रवाई को कमजोर किया जा सके। उधर, तेहरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है।
लगातार हो रहे इन हमलों और शीर्ष सैन्य नेतृत्व के नुकसान ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका को बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा टकराव यदि इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों तक महसूस किया जा सकता है। फिलहाल, हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया की नजर तेहरान और उसके अगले कदम पर टिकी हुई है।














