
यमन में फंसी निमिषा प्रिया को मौत की सजा से बचाने की आखिरी कोशिशें अब और तेज़ हो गई हैं। जिस महिला के सिर पर कुछ ही घंटों में फांसी का फंदा लटक रहा है, अब उसकी जिंदगी के लिए एक नई उम्मीद की किरण फिर से उभरी है। भारत के एक प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु और सुन्नी समाज के सम्मानित नेता एपी अबू बकर मुसलियार ने इस नाजुक मौके पर हस्तक्षेप किया है। उन्होंने ना केवल यमन सरकार से रहम की अपील की है, बल्कि मृतक तलाल अबदो मेहदी के परिवार से भी सीधा संपर्क साधा है।
बताया जा रहा है कि इस बेहद संवेदनशील मामले पर यमन में एक महत्वपूर्ण मीटिंग होने जा रही है, जिसमें निमिषा के वकील सुभाष चंद्रन, तलाल अबदो मेहदी के परिवार के सदस्य, हुडैदा स्टेट कोर्ट के चीफ जस्टिस और यमन शूरा काउंसिल के सदस्य शेख हबीब उमर शामिल होंगे। यह मीटिंग उस आखिरी उम्मीद की तरह देखी जा रही है जो निमिषा को मौत के मुंह से खींच सकती है।
मुसलियार ने इस हस्तक्षेप के लिए अपने करीबी यमनी दोस्त और यमन के प्रभावशाली स्कॉलर शेख हबीब उमर की मदद ली है। हबीब उमर के व्यक्तिगत अनुरोध पर मृतक तलाल के परिवार के कुछ सदस्य और हुदैदा स्टेट कोर्ट के चीफ जस्टिस अब यमन के दमार शहर पहुंचे हैं। यहीं पर मामले को इंसानियत के स्तर पर सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
शेख हबीब उमर की यमन की राजनीति में भी एक मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिससे इस पहल को एक गंभीर और संभावनाशील रूप मिला है। सूत्रों के मुताबिक, तलाल के परिजन अब ब्लड मनी पर पुनर्विचार के लिए तैयार हो सकते हैं, जो निमिषा के लिए एक नई रौशनी की तरह है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी निमिषा के परिवार और भारतीय संगठनों की ओर से तलाल के परिवार को ब्लड मनी (क्षतिपूर्ति की रकम) देने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था। इसके बाद ऐसा लगने लगा था कि निमिषा की सारी उम्मीदें टूट चुकी हैं। मगर अब जबकि परिजन दोबारा बातचीत के लिए तैयार हुए हैं, तो लोगों की आंखों में उम्मीद की चमक लौट आई है।
लेकिन यह भी सच है कि अभी भी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि क्या तलाल का परिवार ब्लड मनी को स्वीकार करता है या नहीं। अगर वे मान जाते हैं, तो निमिषा की जान बच सकती है, और अगर नहीं माने तो उसकी फांसी तय मानी जाएगी।
क्या निमिषा को मिल पाएगी नई ज़िंदगी?
निमिषा के वकील सुभाष चंद्रन ने बताया कि मृतक के परिवार के साथ अब तक तीन दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके अलावा, यमन के अटॉर्नी जनरल से भी संपर्क किया गया है ताकि फांसी की सजा को कुछ समय के लिए टाला जा सके। हालांकि अब जब सिर्फ कुछ ही घंटे बचे हैं, तो पूरे देश की नजर इस बातचीत और मीटिंग पर टिकी है।
सोमवार को भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा था कि उन्होंने अपनी ओर से भरपूर प्रयास किए हैं, लेकिन यमन के कानून बहुत अलग हैं और सरकार किसी सीमा से ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकती।














