
भारतीय चुनाव आयोग द्वारा पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी केरल विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला कर लिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरेगी।
रविवार, 15 मार्च को तेजस्वी यादव ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनता दल आगामी केरल विधानसभा चुनाव एलडीएफ गठबंधन का हिस्सा बनकर लड़ेगी। चुनाव आयोग द्वारा केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में चुनाव की तारीखें घोषित किए जाने के बाद विभिन्न दल अपनी रणनीति तय करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में राजद ने भी केरल की राजनीति में अपनी सक्रिय भागीदारी का संकेत दिया है।
तेजस्वी यादव के इस ऐलान के साथ ही केरल की चुनावी राजनीति में एक नया समीकरण सामने आया है। केरल में मुख्य मुकाबला आमतौर पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच होता रहा है। ऐसे में राजद का एलडीएफ के साथ जाना कांग्रेस और यूडीएफ के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि बिहार की राजनीति में कांग्रेस और राजद एक ही महागठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन केरल में दोनों दल अलग-अलग खेमों में दिखाई देंगे। जहां राजद एलडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, वहीं कांग्रेस यूडीएफ गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। इस वजह से केरल के चुनाव में राजनीतिक समीकरण कुछ अलग नजर आने वाले हैं।
बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने यह फैसला पार्टी के विधायकों और महागठबंधन के नेताओं के साथ चर्चा के बाद लिया है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने राजद के विधायकों के साथ बैठक की, जिसमें विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ और इसी दौरान केरल चुनाव को लेकर रणनीति तय की गई।
इस बीच बिहार की राजनीति भी इन दिनों काफी गर्म है। सोमवार, 16 मार्च को राज्य में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान होना है। खासकर पांचवीं सीट को लेकर सियासी सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं और विभिन्न दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हुए हैं।
इस सीट के परिणाम को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और बहुजन समाज पार्टी की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इन दोनों दलों का समर्थन जिस गठबंधन को मिलेगा, उसी की जीत की संभावना मजबूत हो सकती है। ऐसे में एनडीए और महागठबंधन दोनों की नजर इन दलों के विधायकों पर टिकी हुई है।
केरल चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव ने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी एलडीएफ के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल पहले भी केरल विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है और इस बार भी पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजद का समर्थन एलडीएफ को राज्य में सत्ता बरकरार रखने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही केरल में कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन बिहार में यही दल महागठबंधन के तहत साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इससे साफ है कि भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन और रणनीतियां बदलती रहती हैं।













