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‘ईरान पर अभी कार्रवाई जरूरी थी, नहीं तो भारत के हित भी प्रभावित होते’, इजरायली राजदूत का बयान

नई दिल्ली में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि ईरान के खिलाफ समय रहते कार्रवाई जरूरी थी, अन्यथा भविष्य में भारत समेत कई देशों के हित प्रभावित हो सकते थे। उन्होंने ईरान की संभावित सैन्य योजनाओं, क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 16 Mar 2026 3:26:01

‘ईरान पर अभी कार्रवाई जरूरी थी, नहीं तो भारत के हित भी प्रभावित होते’, इजरायली राजदूत का बयान

नई दिल्ली में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान को लेकर चल रहे तनाव और सैन्य कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कदम केवल इजरायल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक व्यापार के हितों से भी जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में की गई कार्रवाई पश्चिम एशिया में बढ़ते खतरे को रोकने के लिए जरूरी थी। अजार के मुताबिक अगर समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी, जिसका असर भारत सहित कई देशों के दीर्घकालिक हितों पर पड़ सकता था।

2027 तक बड़े हमले की तैयारी कर रहा था ईरान

मीडिया से बातचीत के दौरान रूवेन अजार ने दावा किया कि ईरान आने वाले वर्षों में इजरायल के खिलाफ बड़े हमले की योजना बना रहा था। उनके अनुसार ईरान की रणनीति वर्ष 2027 तक अपनी सैन्य क्षमताओं को इस स्तर तक मजबूत करने की थी कि वह इजरायल पर व्यापक हमला कर सके। इसके साथ ही वह खाड़ी और अरब देशों की मौजूदा व्यवस्था को अस्थिर कर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

अजार का कहना है कि अगर ऐसी स्थिति पैदा होती तो खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और भारत के इन देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने से व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी प्रभाव पड़ता।

उन्होंने आगे कहा, “सोचिए यदि ईरान के पास परमाणु हथियारों का बड़ा भंडार होता तो वह किस तरह के कदम उठा सकता था। हमने पहले भी देखा है कि उसने अपने पड़ोसी देशों के साथ किस प्रकार के टकराव पैदा किए हैं। यदि अमेरिका और इजरायल ने अभी कार्रवाई नहीं की होती तो भविष्य में स्थिति कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती थी।”

वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा

अजार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सैन्य कदम केवल अमेरिका और इजरायल की रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका संबंध उन सभी देशों से भी है जो पश्चिम एशिया के साथ व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। उनके अनुसार यह कदम क्षेत्र में रहने वाले लोगों और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव की आशंका के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि हालात नियंत्रण से बाहर हो जाते तो उनके जीवन और रोजगार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।

इस्लामिक क्रांति के बाद बिगड़े संबंध

इजरायली राजदूत ने यह भी कहा कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीति के रास्ते भी खुले रहने चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अमेरिका और क्षेत्र के कई देशों के साथ राजनयिक माध्यमों से लगातार बातचीत जारी है।

अजार के अनुसार यदि ईरान अपने रुख में बदलाव करता है और इजरायल के अस्तित्व को स्वीकार कर लेता है तो भविष्य में क्षेत्र में स्थिरता और शांति की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा भी था जब ईरान और इजरायल के बीच रिश्ते काफी अच्छे थे, लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं और ईरान ने इजरायल को अपना विरोधी मानना शुरू कर दिया।

अमेरिका और इजरायल के बीच मजबूत तालमेल

रूवेन अजार ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान पर कार्रवाई को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर पूरा तालमेल बना हुआ है।

उनके मुताबिक इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार अमेरिकी नेतृत्व के संपर्क में हैं और उनकी बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा उनकी टीम के साथ जारी है। इस संवाद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि या तो ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों और शर्तों को स्वीकार करे या फिर उसकी सैन्य क्षमता इतनी कमजोर हो जाए कि वह इजरायल और पड़ोसी देशों के लिए खतरा न बन सके।

युद्ध ज्यादा लंबा चलने की संभावना कम

अजार ने यह भी कहा कि इजरायल और अमेरिका को भरोसा है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। उन्होंने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कम करके बताया।

उनके अनुसार यह समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और फिलहाल जहाजों की आवाजाही जारी है। हालांकि उन्होंने माना कि कुछ आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन यह उतने बड़े नहीं होंगे जितने की आशंका जताई जा रही है।

अजार का कहना है कि ईरान लंबे समय तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बाधित करने की स्थिति में नहीं है और हालात जल्द ही सामान्य हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में ईरान की ओर से होने वाले हमलों की तीव्रता कम होती दिखाई दे रही है, जिससे संकेत मिलता है कि उसकी सैन्य क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है।

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