
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक शनिवार दोपहर जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। लगभग 170 दिन सलाखों के पीछे रहने के बाद केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को तुरंत प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया।
हिंसा के बाद हुई गिरफ्तारी
सोनम वांगचुक को 24 सितंबर 2025 को लद्दाख प्रशासन ने हिरासत में लिया था और 26 सितंबर को उन्हें जोधपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया। उन पर लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुई हिंसा भड़काने का आरोप था। इस घटना में चार लोग मारे गए और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।
सुनवाई से पहले सरकार का फैसला
केंद्र सरकार का यह कदम उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर याचिका पर 17 मार्च को सुनवाई तय थी। गृह मंत्रालय के अनुसार, लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए उनकी हिरासत खत्म करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लद्दाख की जनता की आकांक्षाओं को संवाद के जरिए हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वांगचुक ने जताई अपनी प्रतिबद्धता
रिहाई से पहले सोशल मीडिया पोस्ट में वांगचुक ने लिखा, “मैं सक्रियता से पीछे नहीं हटा हूं। हमारा संघर्ष लद्दाख की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए था और आगे भी रहेगा।” इसके अलावा, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने लगातार उनकी रिहाई की मांग उठाई थी।
लद्दाख का आगे का रुख
170 दिन बाद हुई रिहाई को लद्दाख में एक बड़ी जीत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब केंद्र सरकार हाई-पावर्ड कमेटी के माध्यम से लद्दाख के नेताओं के साथ नए सिरे से बातचीत कर सकती है, ताकि महीनों से चल रहे विरोध और हड़ताल को समाप्त किया जा सके और क्षेत्र में स्थिरता स्थापित हो।














