
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बहुत जल्द युद्धविराम पर चर्चा के लिए आमने-सामने बैठने वाले हैं। ट्रंप के मुताबिक अब आगे की पूरी जिम्मेदारी जेलेंस्की के कंधों पर है। यह टिप्पणी ट्रंप ने अलास्का में पुतिन से मुलाकात के तुरंत बाद की।
"जेलेंस्की को करनी होगी डील"
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब जेलेंस्की को आगे बढ़कर तीन साल से चली आ रही इस जंग को खत्म करने के लिए कोई ठोस रास्ता निकालना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस एक बड़ी ताकत है और उसकी सैन्य क्षमता से कोई इंकार नहीं कर सकता। ऐसे में अगर यूक्रेन को शांति चाहिए, तो उसे समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना ही होगा।
"जरूरत पड़ी तो मैं फिर शामिल हो जाऊंगा"
अलास्का मीटिंग के बाद ट्रंप ने संकेत दिए कि अब अगली चाल यूक्रेनी राष्ट्रपति की है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूरोपीय देशों को भी इस प्रक्रिया में थोड़ी-बहुत भूमिका निभानी होगी। ट्रंप बोले– अगर जेलेंस्की चाहेंगे, तो मैं अगली मुलाकात का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूं। उनका दावा है कि बहुत जल्द एक त्रिपक्षीय बैठक हो सकती है, जिसमें पुतिन, जेलेंस्की और वे खुद आमने-सामने होंगे। वहीं पुतिन ने साफ कर दिया है कि अगली चर्चा मॉस्को में होने की संभावना है।
अलास्का वार्ता – नतीजा क्या निकला?
करीब तीन घंटे चली अलास्का मीटिंग में ट्रंप और पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर लंबी बातचीत की। हालांकि किसी औपचारिक सीजफायर का ऐलान नहीं हुआ। दोनों नेताओं ने वार्ता को सकारात्मक बताया लेकिन यह भी स्वीकार किया कि कई अहम बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई। ट्रंप ने कहा कि वे अगली बार नाटो देशों और यूक्रेनी नेतृत्व से अलग से बात करेंगे। वहीं पुतिन ने दोहराया कि रूस की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है और पश्चिमी देश वार्ता में रुकावट डाल रहे हैं।
पुतिन की सख्त शर्तें बरकरार
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक बार फिर साफ कर दिया कि जंग को खत्म करने के लिए उन्हें अपनी शर्तों पर ही मंजूरी चाहिए। रूस यह चाहता है कि यूक्रेन अपनी विदेश और रक्षा नीतियों में ऐसी कोई रणनीति न अपनाए जिससे भविष्य में रूस के लिए खतरा पैदा हो। इसके अलावा मास्को की मांग है कि यूक्रेन नाटो से पूरी तरह दूरी बनाए। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस एक इंच जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही, उन्होंने पश्चिमी देशों से सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और जब्त की गई रूसी संपत्तियों को वापस लौटाने की बात दोहराई।














