
बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने गाय की कुर्बानी को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाओं की संभावना जताई जा रही है।
हुमायूं कबीर ने कहा कि कुर्बानी की परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी धार्मिक प्रथा है, जो 1400 साल पहले से चली आ रही है और जब तक यह दुनिया कायम है, तब तक जारी रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस परंपरा को कोई भी ताकत रोक नहीं सकती।
‘कुर्बानी तो होगी ही’—सरकार पर भी साधा निशाना
अपने बयान में हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार की नीतियों पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग बयान आते हैं, जिस पर वे कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे किसी भी प्रकार की सलाह दे या रोक लगाने की कोशिश करे, लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुर्बानी जारी रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार लोगों को कुछ चीजें खाने या न खाने के लिए कहती है, तो यह उनका अधिकार हो सकता है, लेकिन धार्मिक आस्थाओं से जुड़े कार्यों को रोका नहीं जा सकता।
#WATCH | Kolkata: On the state government's notice for the public under the West Bengal Animal Slaughter Control Act 1950, Aam Janata Unnayan Party (AJUP) chief Humayun Kabir says, “The govt can make a rule asking Muslims not to eat beef, but ritual sacrifice (qurbani) will… pic.twitter.com/b3qj0g2tcV
— ANI (@ANI) May 21, 2026
‘कुर्बानी पर कोई रोक नहीं लगा सकता’—कड़ा बयान
AJUP प्रमुख ने अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि कोई कुर्बानी को रोकने की कोशिश करता है, तो उसकी बात को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी।
हुमायूं कबीर ने कहा कि गाय के साथ-साथ बकरी, ऊंट, दुम्बा सहित उन सभी पशुओं की कुर्बानी होती रहेगी, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से स्वीकार किया गया है। उनके अनुसार, इस परंपरा को समाप्त करने का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सकता।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और हुमायूं कबीर का सफर
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक चर्चित चेहरा रहे हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर एक नई मस्जिद बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।
इसके बाद उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी—आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP)—का गठन किया। दिलचस्प बात यह रही कि नई पार्टी के गठन के बाद ही उन्होंने विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की और बंगाल की दो सीटों पर जीत दर्ज की। उन्होंने खुद रेजीनगर और नौदा सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की, जिससे वे राज्य की राजनीति में एक बार फिर चर्चा में आ गए।













