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बंगाल में मदरसों में भी अनिवार्य हुआ ‘वंदे मातरम’ का गायन, शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा निर्देश

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अब मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा। इससे पहले स्कूलों में भी यह नियम लागू किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, जबकि इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 21 May 2026 11:00:24

बंगाल में मदरसों में भी अनिवार्य हुआ ‘वंदे मातरम’ का गायन, शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा निर्देश

पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक व्यवस्था में लगातार सख्त और तेज़ फैसलों की झड़ी लग गई है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक और अहम निर्णय लेते हुए अब मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। इससे पहले सरकार ने सभी स्कूलों में इस राष्ट्रीय गीत को लागू करने का आदेश दिया था, जिसे महज एक सप्ताह ही बीता है।

मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में साफ किया गया है कि राज्य के सभी मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होगा और राज्य के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त तथा गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों पर लागू रहेगा।

सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।

स्कूलों के बाद अब मदरसों तक विस्तार

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य किया था। निर्देश के अनुसार, अब हर शैक्षणिक संस्थान में सुबह की प्रार्थना की शुरुआत इसी राष्ट्रीय गीत से होगी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को लेकर कहा था कि पुराने सभी निर्देशों को संशोधित करते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके तहत राज्य के सभी स्कूलों में कक्षाओं की शुरुआत से पहले राष्ट्रीय गीत का गायन सुनिश्चित किया जाएगा।

सभी छह अंतरों का गायन क्यों किया गया जरूरी?

बताया जा रहा है कि वर्ष 2026 की शुरुआत में केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्व देते हुए इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की दिशा में कदम उठाए थे। इसके तहत यह निर्देश भी दिया गया था कि सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के पूरे छह अंतरों का गायन अनिवार्य रूप से किया जाए।

बंगाल सरकार का यह ताज़ा आदेश भी उसी व्यापक नीति और दिशा-निर्देशों के अनुरूप माना जा रहा है, जिसे राज्य स्तर पर लागू किया गया है।

दक्षिण भारत में भी गरमाई बहस


राष्ट्रीय गीत के पूर्ण संस्करण को लेकर चल रहा विवाद अब केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रह गया है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी इसे लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।

तमिलनाडु में हाल ही में हुई नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण संस्करण बजाए जाने को लेकर डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया था।

इसी तरह केरल में यूडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों का गायन हुआ, जिसके बाद वाम दलों ने सरकार की आलोचना करते हुए इस पर सवाल उठाए।

हालांकि सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि पूरा कार्यक्रम राजभवन के प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित किया गया था और इसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक मंशा नहीं थी।

दूसरी ओर भाजपा ने इन आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए वामपंथी दलों पर भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के विरोध का आरोप लगाया है।

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