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नोएडा फैक्ट्रियों में मजदूरी में बड़ा फर्क, अकुशल श्रमिक को ₹13,690 तो कुशल को ₹16,868 सैलरी; जानें दोनों में अंतर क्या है

नोएडा की फैक्ट्रियों में अकुशल और कुशल श्रमिकों की सैलरी में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जानिए मजदूरी कैसे तय होती है, श्रमिकों की कैटेगरी क्या हैं और दोनों वेतन में कितना फर्क है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 17 Apr 2026 12:28:56

नोएडा फैक्ट्रियों में मजदूरी में बड़ा फर्क, अकुशल श्रमिक को ₹13,690 तो कुशल को ₹16,868 सैलरी; जानें दोनों में अंतर क्या है

नोएडा की औद्योगिक इकाइयों में हाल ही में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन ने माहौल गर्म कर दिया। बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों और कंपनियों में काम करने वाले श्रमिक सड़कों पर उतर आए और उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता है, लेकिन वेतन के नाम पर बेहद कम राशि दी जाती है। कई मजदूरों ने दावा किया कि उन्हें दिनभर की मेहनत के बदले लगभग 300 रुपये रोजाना ही मिलते हैं।

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर झड़प और हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए मजदूरी बढ़ाने का निर्णय लिया और सभी औद्योगिक इकाइयों को नए वेतन ढांचे का पालन करने के निर्देश जारी किए। अब कंपनियों के बाहर लगाए गए बैनरों में स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि किस श्रेणी के श्रमिक को कितनी सैलरी मिलेगी।

मजदूरी तय करने का आधार क्या है?

सरकारी नियमों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण एक निश्चित ढांचे के तहत किया जाता है, जिसे लेबर कोड कहा जाता है। इसमें मजदूरी तय करने के लिए तीन प्रमुख आधार माने जाते हैं।

पहला आधार भौगोलिक क्षेत्र (Geographical Area) है, यानी मजदूर किस स्थान पर काम कर रहा है। बड़े शहर, छोटे कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत अलग-अलग होती है, इसलिए वेतन भी उसी अनुसार तय किया जाता है।

दूसरा आधार अनुभव (Experience) होता है। किसी भी काम में व्यक्ति के अनुभव के स्तर के अनुसार उसकी मजदूरी में अंतर किया जाता है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण आधार कौशल (Skill Level) है। इसी आधार पर श्रमिकों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है और उनका वेतन तय होता है।

श्रमिकों की चार प्रमुख श्रेणियां

अकुशल (Unskilled): इस श्रेणी में वे श्रमिक आते हैं जिन्हें किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। जैसे दिहाड़ी मजदूर, सामान ढोने वाले या सामान्य सहायक कार्य करने वाले कर्मचारी।

अर्ध-कुशल (Semi-skilled): ये वे कामगार होते हैं जिन्हें काम की थोड़ी जानकारी होती है, लेकिन वे पूरी तरह विशेषज्ञ नहीं होते। वे निर्देशों के आधार पर काम को आगे बढ़ाते हैं।

कुशल (Skilled): इस श्रेणी में वे लोग आते हैं जो अपने कार्य में पूरी तरह दक्ष होते हैं। मशीन संचालन, तकनीकी काम या किसी विशेष प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से करने वाले कर्मचारी इसी श्रेणी में आते हैं।

अत्यधिक कुशल (Highly Skilled): इसमें वे पेशेवर शामिल होते हैं जिनके पास उच्च तकनीकी विशेषज्ञता होती है और जो जटिल कार्यों को संभालने में सक्षम होते हैं।

सैलरी में कितना अंतर देखने को मिलता है?

वेतन में अंतर काफी स्पष्ट है और यह श्रमिक की श्रेणी पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर अकुशल श्रमिकों को लगभग 12,000 से 15,000 रुपये तक मासिक वेतन मिलता है। अर्ध-कुशल श्रमिकों की सैलरी करीब 17,000 रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं कुशल श्रमिकों को 20,000 से 22,000 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलता है, जबकि अत्यधिक कुशल कर्मचारियों की आय इससे भी अधिक होती है।

हाल ही में कुछ राज्यों में मजदूरी में लगभग 30 से 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी की गई है, जिसके बाद कई औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन संशोधन की मांग तेज हो गई है।

केंद्र सरकार के न्यूनतम वेतन मानक

केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार दैनिक और मासिक न्यूनतम मजदूरी इस प्रकार निर्धारित की गई है—

अकुशल (Unskilled): ₹783 प्रतिदिन (₹20,358 मासिक)
अर्ध-कुशल (Semi-skilled): ₹868 प्रतिदिन (₹22,568 मासिक)
कुशल (Skilled): ₹954 प्रतिदिन (₹24,804 मासिक)
अत्यधिक कुशल (Highly Skilled): ₹1035 प्रतिदिन (₹26,910 मासिक)

ये दरें श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम सुरक्षा ढांचा प्रदान करती हैं, जिसके नीचे भुगतान नहीं किया जा सकता।

फैक्ट्रियों में कैसे तय होती है श्रेणियां?

नोएडा के औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, फैक्ट्रियों में काम को उसकी प्रकृति के आधार पर बांटा जाता है। जैसे किसी फैक्ट्री में सामान्य सहायक कार्य करने वाला व्यक्ति अकुशल श्रमिक माना जाता है—जैसे सामान उठाना, पैकिंग में मदद करना या मशीनों के बीच सामग्री पहुंचाना।

अर्ध-कुशल श्रमिक वे होते हैं जो कुछ तकनीकी कार्य करते हैं, जैसे माप लेना, छोटे-मोटे पार्ट्स जोड़ना या उत्पादन प्रक्रिया में आंशिक योगदान देना।

कुशल श्रमिक वे होते हैं जो पूरी प्रक्रिया को संचालित करते हैं, जैसे मशीन ऑपरेटर या टेलर जो अंतिम उत्पाद तैयार करते हैं। इन्हें नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि उनकी दक्षता बनी रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार, अनुभव और प्रशिक्षण के आधार पर अकुशल श्रमिक भी समय के साथ कुशल श्रेणी में पहुंच सकते हैं, जिससे उनकी आय और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ती हैं।

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