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TMC में बड़ी टूट की आशंका, 59 विधायकों के समर्थन का दावा लेकर बागी नेता विधानसभा पहुंचे, अलग गुट बनाने की तैयारी तेज

TMC में बड़ी टूट की आशंका, 59 विधायकों के समर्थन का दावा लेकर बागी नेता विधानसभा पहुंचे, अलग गुट बनाने की तैयारी तेज

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 03 Jun 2026 12:21:46

TMC में बड़ी टूट की आशंका, 59 विधायकों के समर्थन का दावा लेकर बागी नेता विधानसभा पहुंचे, अलग गुट बनाने की तैयारी तेज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ताधारी पार्टी All India Trinamool Congress (टीएमसी) एक बड़े आंतरिक संकट के दौर से गुजरती नजर आ रही है। हालिया चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और अब संगठन में संभावित विभाजन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी से निष्कासित विधायक रीताब्रत बनर्जी विधानसभा पहुंच चुके हैं और उनके साथ 59 विधायकों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इसी आधार पर वह अलग गुट बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, विधानसभा परिसर में हलचल लगातार बढ़ती जा रही है और टीएमसी से जुड़े कई विधायक भी एक-एक कर वहां पहुंच रहे हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक किसी भी पक्ष ने खुलकर आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।

बागी नेताओं का स्पीकर से मिलने का दावा

जानकारी के मुताबिक टीएमसी के दो बागी विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा खुद को “असली टीएमसी प्रतिनिधि समूह” बताते हुए विधानसभा स्पीकर से मिलने की तैयारी में हैं। उनका दावा है कि उनके पास 59 विधायकों का समर्थन पत्र मौजूद है, जिस पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रीताब्रत बनर्जी को हाल ही में पार्टी ने निष्कासित किया था, जिसके बाद से उनके राजनीतिक रुख को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह समूह विधानसभा में एक अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग कर सकता है और इसी संबंध में स्पीकर को औपचारिक पत्र सौंपे जाने की संभावना है।

विधानसभा में बढ़ी हलचल, टीएमसी ने भी तेज की रणनीति

दूसरी ओर, टीएमसी भी इस संभावित टूट को लेकर सतर्क नजर आ रही है। पार्टी की ओर से तत्काल राजनीतिक रणनीति को सक्रिय किया गया है ताकि स्थिति पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी क्रम में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और संसदीय बदलावों की मांग रखी है।

पत्र में उन्होंने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की बात कही है। इसके साथ ही विपक्ष के उप नेता के लिए आशिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को मुख्य सचेतक बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में स्थापित परंपराओं के अनुसार सदन की कार्यवाही में इन भूमिकाओं की स्पष्टता जरूरी है।

संवैधानिक गणित पर टिकी पूरी राजनीति

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल दलबदल कानून और विधायकों की संख्या का है। जानकारी के अनुसार, हाल के चुनाव में टीएमसी के कुल 80 विधायक चुने गए थे। संवैधानिक प्रावधानों के तहत किसी भी दल में विभाजन को वैध ठहराने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन जरूरी होता है।

इस गणित के अनुसार, यदि 54 या उससे अधिक विधायक अलग गुट बनाते हैं तो उस पर दलबदल कानून लागू नहीं होता और उनकी विधायकी भी सुरक्षित रहती है। मौजूदा स्थिति में 59 विधायकों के समर्थन के दावे ने राजनीतिक समीकरणों को और अधिक जटिल बना दिया है।

आगे की स्थिति पर टिकी निगाहें

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में यह दावा विधानसभा में औपचारिक रूप लेता है या फिर यह सिर्फ राजनीतिक दबाव की रणनीति साबित होता है। स्पीकर की भूमिका और आने वाले दिनों में विधायकों का रुख इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा। बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

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