
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधानपरिषद में विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण केवल औपचारिकता नहीं होता, बल्कि वह सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। ऐसे में संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति असम्मानजनक व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य प्रतिपक्ष का आचरण मर्यादित नहीं रहा।
‘संवैधानिक पद का सम्मान जरूरी’
सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख होती हैं और उनके प्रति प्रतिपक्ष का व्यवहार गरिमापूर्ण होना चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि इस प्रकार का आचरण लोकतंत्र की आत्मा को आहत करता है और इसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस प्रकार की राजनीति विपक्ष कर रहा है, उससे संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की अपेक्षा करना कठिन है।
कानून-व्यवस्था पर सरकार का दावा
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की स्थिति अलग थी और अपराधी तत्वों का बोलबाला था। उनके मुताबिक, उस समय प्रदेश में माफिया तंत्र हावी था और शासन व्यवस्था प्रभावित थी।
सीएम योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने “रूल ऑफ लॉ” स्थापित किया है। उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा—यूपी में सब चंगा है।” उनका कहना था कि अब प्रदेश की पहचान अराजकता से नहीं, बल्कि विकास और सांस्कृतिक आयोजनों से होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रांताओं का महिमामंडन या देशविरोधी गतिविधियों का समर्थन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
धार्मिक मुद्दों पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर धार्मिक आस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने अतीत में ऐसे आयोजनों का समर्थन किया, जिन पर व्यापक विवाद रहा, जबकि कांवड़ यात्रा जैसे कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर और काशी विश्वनाथ से जुड़े मुद्दों पर भी विपक्ष का रुख सकारात्मक नहीं रहा।
सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रनायकों और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने विपक्ष पर ‘वंदे मातरम्’ के अपमान का भी आरोप लगाया और पूछा कि राष्ट्रगीत से आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्रगीत का अपमान संविधान की भावना के विपरीत है।
विकास और अर्थव्यवस्था पर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते छह वर्षों में उत्तर प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके अनुसार, राज्य अब राजस्व के मामले में बेहतर स्थिति में है और कई क्षेत्रों में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी है और किसान अब केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि उद्यमी की भूमिका में आगे बढ़ रहे हैं। “यूपी सही दिशा में आगे बढ़ रहा है,” उन्होंने कहा। साथ ही यह भी जोड़ा कि अब राज्य की पहचान रंगोत्सव और दीपोत्सव जैसे आयोजनों से जुड़ रही है, जो सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, विधानपरिषद में मुख्यमंत्री का भाषण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से लेकर कानून-व्यवस्था, धार्मिक आस्थाओं और विकास के मुद्दों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर तीखे प्रहार किए और अपनी सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से रखा।














