भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई में इन दिनों राजनीतिक हलचल बढ़ती नजर आ रही है। चर्चा जोरों पर है कि पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई भाजपा से अलग हो सकते हैं और जल्द ही अपने नए राजनीतिक दल की घोषणा भी कर सकते हैं। हालांकि, इन अटकलों पर अन्नामलाई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दिलचस्प बात यह है कि यह चर्चाएं ऐसे समय पर सामने आ रही हैं जब यह भी माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
नई पार्टी गठन की अटकलें तेज
मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषकर न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्रों का दावा है कि अन्नामलाई भाजपा छोड़कर एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं। इन दावों को और हवा उनके समर्थकों की सोशल मीडिया गतिविधियों से मिल रही है, जहां लगातार नई पार्टी के संभावित नाम और झंडे के डिज़ाइन को लेकर पोस्ट साझा किए जा रहे हैं।
हालांकि, इन सभी चर्चाओं के बीच अन्नामलाई ने खुद किसी भी तरह की पुष्टि या खंडन नहीं किया है, जिससे स्थिति और भी रहस्यमय बनी हुई है।
क्या नाराजगी बनी वजह? तीन भाषा विवाद में अलग रुख
सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में अन्नामलाई का केंद्र सरकार के कुछ फैसलों पर अलग रुख देखने को मिला है, खासकर तीन भाषा नीति को लेकर। मई में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से उस अधिसूचना को वापस लेने की अपील की थी, जिसमें कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं को अनिवार्य करने की बात कही गई थी।
अन्नामलाई का कहना था कि मंत्रालय को अपनी पुरानी प्रतिबद्धता पर कायम रहना चाहिए, जिसके तहत 2029-30 शैक्षणिक सत्र से तीन भाषाओं की नीति लागू करने की योजना थी और इसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होनी चाहिए थीं।
इसके अलावा, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 15 मई 2026 को जारी उस निर्देश का भी जिक्र किया जा रहा है, जिसमें कक्षा नौ के लिए तत्काल प्रभाव से तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया गया था, जबकि पहले इसे 2029-30 सत्र से लागू किया जाना था। इस बदलाव को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था।
पहले भी जताई थी नीति पर सहमति
गौर करने वाली बात यह है कि अप्रैल 2026 में जब CBSE ने कक्षा छठी के लिए तीन भाषा नीति की घोषणा की थी, जिसमें दो भारतीय भाषाओं को अनिवार्य बताया गया था, तब अन्नामलाई ने उस फैसले का समर्थन किया था। उनके इसी बदले हुए रुख को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
AIADMK गठबंधन और अंदरूनी मतभेद की चर्चा
अन्नामलाई को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि वह तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन के फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थे। हालांकि, उन्होंने पिछले विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था।
कुछ समय पहले ही उन्हें तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, जिससे राज्य इकाई की चुनौतियां और बढ़ गईं।
नई जिम्मेदारी या नई राजनीतिक राह?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अन्नामलाई को दिल्ली स्तर पर कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि उन्हें आंध्र प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने पर विचार हो सकता है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा की कमान संभाली और इस दौरान पार्टी को राज्य में मजबूत करने की कोशिशें कीं, लेकिन भाजपा अब तक दक्षिण भारत के इस प्रमुख राज्य में अपेक्षित राजनीतिक सफलता हासिल नहीं कर पाई है।
वर्तमान में तमिलनाडु की सत्ता मुख्यमंत्री सी. जोसेफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पास है, और अन्नामलाई को इस सरकार का एक मुखर आलोचक माना जाता है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।













