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‘कुछ तो ठीक नहीं’, SIR को लेकर सचिन पायलट का गंभीर आरोप — कहा, ‘जल्दबाजी में निर्धारित की गई डेडलाइन…’

हालिया SIR प्रक्रिया पर सचिन पायलट ने चुनाव आयोग के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में जल्दबाजी, अधिकारियों पर दबाव और पारदर्शिता की कमी से जनता में डर और अविश्वास बढ़ा है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sat, 29 Nov 2025 8:03:12

‘कुछ तो ठीक नहीं’, SIR को लेकर सचिन पायलट का गंभीर आरोप — कहा, ‘जल्दबाजी में निर्धारित की गई डेडलाइन…’

कांग्रेस के प्रमुख नेता सचिन पायलट ने शनिवार (29 नवंबर) को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान देशभर में डर और अविश्वास का माहौल बन गया है। पायलट का आरोप है कि फील्ड कर्मचारियों पर अनुचित दबाव, असामान्य गति से चल रही प्रक्रिया और जल्दबाजी में निर्धारित समयसीमा इस पूरी कवायद पर सवाल खड़े करती है।

जयपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पायलट ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, इसका आयोजन कई बार हो चुका है। लेकिन, मौजूदा वर्ष की तरह जनता में भ्रम, चिंता और आशंका पहले कभी पैदा नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “देश में SIR कई बार आयोजित हुई है, पर इस बार जैसी शंका और चर्चा पहले कभी नहीं देखी गई। पहली बार चुनाव आयोग का रवैया जनता को असहज कर रहा है और यही सबसे बड़ी चिंता का विषय है।”

‘SIR में लगे अधिकारी भारी दबाव झेल रहे हैं’

पायलट ने आरोप लगाया कि बिहार में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की घटनाओं के बाद अब विभिन्न राज्यों में SIR से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी तीव्र दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस दबाव का असर इतना गंभीर है कि कई जगह मानसिक तनाव की स्थिति बन गई है और कुछ लोग तो जीवन समाप्त करने जैसे कदम तक उठा रहे हैं। उनके अनुसार यह साफ संकेत है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन की कमी है।

‘EC को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर कार्य करना चाहिए’

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट ने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य करना है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, न कि किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रव्यापी स्तर पर अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने में लगी है कि कोई भी कमजोर या हाशिए पर रहने वाला नागरिक अपना वोट अधिकार न खोए।

‘गरीब, दलित, आदिवासी और बुजुर्गों के अधिकारों से समझौता नहीं’

पायलट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जागरूकता की कमी, दबाव या किसी पक्ष की मंशा से किसी भी व्यक्ति—खासतौर पर गरीब, दलित, जनजातीय समुदाय और वरिष्ठ नागरिक—का नाम सूची से हटाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग किसी भी राजनीतिक दबाव में आएगा, किसी विचारधारा या सत्ता पक्ष के इशारे पर चलेगा, तो कांग्रेस और जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग को निष्पक्षता का पालन करना होगा। लोकतंत्र में उसकी भूमिका बेहद अहम है। अगर वह किसी प्रभाव में आकर कार्य करेगा, तो यह न जनता के हित में होगा और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया के।”

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