
राजस्थान के जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी धीरे-धीरे सुलझती नजर नहीं आ रही। पुलिस ने इस मामले में तीन प्रमुख लोगों को संदिग्ध बताया है, लेकिन अभी तक जांच में ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। जांच में नाम शामिल हैं – साध्वी के पिता वीरम नाथ, इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवी सिंह और आश्रम का रसोइया सुरेश।
साध्वी प्रेम बाईसा का आश्रम जोधपुर के आरती नगर इलाके की पाल रोड पर स्थित है। बताया गया कि एक दिन साध्वी को अचानक सर्दी और बुखार हुआ। इसके बाद उन्हें आश्रम में ही इंजेक्शन दिया गया। लेकिन इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों में उनकी हालत और खराब हो गई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पिता का बयान और इंजेक्शन का मामला
वीरम नाथ, जो खुद आश्रम में रहते हैं, ने पुलिस को बताया कि सुबह 11:54 बजे उन्होंने कंपाउंडर देवी सिंह को फोन किया। देवी सिंह ने शुरू में 3 बजे आने की बात कही, लेकिन वह केवल शाम 5:10 से 5:15 बजे के बीच पहुंचे।
देवी सिंह ने साध्वी से उनकी तबियत के बारे में पूछा। साध्वी ने सर्दी और जुकाम की शिकायत की। इसके बाद देवी सिंह ने उन्हें इंजेक्शन लगाया और कुछ गोलियां दी, फिर आश्रम से चले गए। लगभग 9 मिनट के भीतर ही साध्वी की हालत तेजी से बिगड़ गई। वह जोर-जोर से रोने लगीं और सांस लेने में कठिनाई जताने लगीं।
वीरम नाथ ने साध्वी को गोद में उठाया और अस्पताल की ओर भागे। रास्ते में उन्होंने देवी सिंह को फोन कर आरोप लगाया कि उन्होंने जहरीला इंजेक्शन दिया। कुछ ही देर बाद साध्वी बेहोश हो गईं। प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुँचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस तीन दिन से देवी सिंह से इस मामले में पूछताछ कर रही है।
देवी सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि वह साध्वी और उनके परिवार को कई सालों से जानते थे और पहले भी कई बार उनका इलाज कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के अनुसार ही साध्वी को इंजेक्शन दिया था और कोई अनियमितता नहीं थी।
रसोइया सुरेश पर भी पुलिस की नजर
पुलिस आश्रम के रसोइया और सहायक सुरेश पर भी शक जता रही है। वह खुद को घटना का चश्मदीद बताता है। सुरेश को आश्रम के रोजमर्रा के कामकाज, खाना बनाने और व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सुरेश ने पुलिस को बताया कि साध्वी 27 जनवरी को अजमेर से आश्रम आई थीं। अगली सुबह उन्होंने गले में खराश की शिकायत की और गरारे किए। शाम को साध्वी ने उन्हें फोन कर गेट खोलने के लिए कहा। सुरेश के मुताबिक, जब उन्होंने गेट खोला तो देवी सिंह सीधे साध्वी के कमरे में चले गए। इलाज के दौरान वह कमरे में मौजूद नहीं थे।
सुरेश ने आगे बताया कि कुछ ही देर बाद उन्होंने साध्वी की चीख सुनी और देखा कि वह आश्रम के मेन गेट पर गिर गई थीं। यात्रा के दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और उन्होंने सीपीआर देने की कोशिश भी की।
जांच में क्या हो रहा है
पुलिस ने आश्रम से सुरेश द्वारा बनाए गए खाने के सैंपल जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और टॉक्सिकोलॉजी के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। यह रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि साध्वी की मौत प्राकृतिक कारण से हुई या किसी हानिकारक पदार्थ के कारण हुई।
पुलिस फिलहाल तीनों संदिग्धों की गतिविधियों और बयान की पड़ताल में जुटी हुई है। जल्द ही जांच की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है और मामला आम जनता के सामने खुलकर आएगा।














