
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के पीछे कई कारक जिम्मेदार होते हैं—अनुवांशिक कारण, पर्यावरण, जीवनशैली और खान-पान। अक्सर हम व्यायाम, धूम्रपान या शराब की आदतों पर चर्चा करते हैं, लेकिन हमारी थाली में परोसा जाने वाला भोजन भी उतना ही निर्णायक साबित हो सकता है। हाल में किए गए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने संकेत दिया है कि यदि लोग शाकाहारी भोजन पद्धति को अपनाते हैं, तो कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। यह शोध ब्रिटेन की प्रतिष्ठित University of Oxford से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा किया गया।
भोजन और बीमारी का गहरा संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि आहार केवल वजन या फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर की कोशिकाओं के व्यवहार, हार्मोन संतुलन और इम्यून सिस्टम पर भी प्रभाव डालता है। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मांसाहार से दूरी बनाते हैं और मुख्य रूप से फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और नट्स का सेवन करते हैं, उनमें कैंसर के कुछ प्रकार अपेक्षाकृत कम देखे गए।
शोधकर्ताओं के अनुसार, पौधों पर आधारित आहार में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसके विपरीत, अत्यधिक प्रोसेस्ड या रेड मीट का सेवन कुछ कैंसरों के जोखिम को बढ़ाने से जुड़ा पाया गया है।
किन-किन कैंसरों पर दिखा असर?
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि शाकाहारी आहार अपनाने वालों में कई प्रकार के कैंसर का खतरा कम पाया गया। आंकड़ों के अनुसार:
ब्लड कैंसर का जोखिम लगभग 31% तक कम
किडनी कैंसर का खतरा करीब 28% कम
पैंक्रियाज कैंसर की संभावना लगभग 21% कम
प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम 12% तक घटा
ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में करीब 9% कमी
विशेषज्ञ मानते हैं कि शाकाहारी भोजन शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है। बेहतर पाचन, नियंत्रित बॉडी वेट और हार्मोनल संतुलन जैसे कारक कैंसर के जोखिम को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
लंबी अवधि का व्यापक विश्लेषण
यह अध्ययन सीमित दायरे का नहीं था। इसमें भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और ताइवान सहित कई देशों के 18 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोध लगभग 16 वर्षों तक चला, जिससे इसके निष्कर्षों को गंभीरता से देखा जा रहा है।
अध्ययन में प्रतिभागियों को उनके खान-पान के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया—मांसाहारी, मछली खाने वाले (पेस्केटेरियन), शाकाहारी और वीगन। इतने बड़े सैंपल साइज और लंबी अवधि के अवलोकन के कारण यह शोध आहार और कैंसर के बीच संबंध को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या केवल डाइट ही काफी है?
हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल शाकाहारी बन जाना कैंसर से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित वजन, तंबाकू से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी उतनी ही जरूरी हैं। फिर भी, यह अध्ययन इस ओर इशारा करता है कि यदि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव किए जाएं—खासतौर पर भोजन से जुड़े—तो गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।













