
होली उमंग, रंग और मस्ती का प्रतीक है, लेकिन जश्न खत्म होते-होते कई लोगों की आंखें परेशान हो जाती हैं। रंग खेलने के कुछ समय बाद ही जलन, आंखों का लाल पड़ना, लगातार पानी आना या रेत जैसा एहसास होना आम शिकायतें बन जाती हैं। दरअसल, बाजार में मिलने वाले कई रंगों में मौजूद केमिकल, हवा में उड़ी धूल और बार-बार पानी डालने की आदत आंखों की संवेदनशील परत को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआती दिक्कत से ज्यादा नुकसान अक्सर बाद में की गई लापरवाहियों से होता है। ऐसे में जरूरी है कि सही जानकारी के साथ आंखों की देखभाल की जाए।
होली के बाद लोग अक्सर कौन सी गलतियां कर बैठते हैं?
1. घबराकर आंखें मलना
जलन या खुजली महसूस होते ही ज्यादातर लोग आंखों को तेजी से रगड़ने लगते हैं। यही सबसे बड़ी भूल है। ऐसा करने से रंग के बारीक कण आंख के अंदर और गहराई तक पहुंच सकते हैं। इससे कॉर्निया पर खरोंच आने, सूजन बढ़ने या संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। आंखें जितनी नाजुक होती हैं, उतना ही कोमल व्यवहार उनके साथ जरूरी है।
2. बिना सलाह के दवाइयों का इस्तेमाल
हल्की सूखापन या चुभन होने पर लोग मेडिकल स्टोर से मनमर्जी आई ड्रॉप ले आते हैं। सामान्य लुब्रिकेटिंग, प्रिज़र्वेटिव-फ्री आई ड्रॉप्स अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन हर समस्या का समाधान दवा नहीं है। एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड युक्त ड्रॉप्स का प्रयोग बिना नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के करना नुकसानदेह हो सकता है। गलत दवा लक्षणों को छिपा सकती है या स्थिति को और जटिल बना सकती है
3. घरेलू उपायों पर आंख मूंदकर भरोसा
कुछ लोग गुलाब जल, ठंडे दूध या घर में तैयार घोल का उपयोग आंखों में करने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये प्रयोग संक्रमण, एलर्जी या जलन को बढ़ा सकते हैं। आंख शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग है, इसलिए अप्रमाणित नुस्खों से दूरी बनाए रखना ही बेहतर है।
सही तरीके से आंखों की सफाई कैसे करें?
नेत्र चिकित्सकों की सलाह है कि यदि आंखों में रंग चला जाए तो सबसे पहले उन्हें साफ पानी से धीरे-धीरे धोना चाहिए। एक बार नहीं, बल्कि 2–3 बार हल्के बहाव वाले पानी से आंखों को फ्लश करना फायदेमंद रहता है। इससे रंग के सूक्ष्म कण बाहर निकलने में मदद मिलती है। ध्यान रखें कि पानी का दबाव तेज न हो और आंखों पर जोर न डाला जाए।
यदि जलन बनी रहे, धुंधला दिखाई दे या दर्द बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच गंभीर समस्या से बचा सकती है।
आगे के लिए क्या रखें ध्यान?
होली खेलते समय सुरक्षात्मक चश्मा या सनग्लास पहनना एक आसान लेकिन असरदार उपाय है।
किसी के चेहरे पर सीधे रंग फेंकने से बचें, खासकर आंखों की दिशा में।
प्राकृतिक या नॉन-टॉक्सिक रंगों का चयन करें, जिनमें हानिकारक रसायन न हों।
त्योहार के बाद चेहरे और आंखों के आसपास की सफाई हल्के हाथों से करें, ज्यादा रगड़ने से बचें।
कब लें डॉक्टर की मदद?
यदि आंखों में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, लगातार धुंधलापन या पीला स्राव दिखे, तो इसे सामान्य जलन समझकर नजरअंदाज न करें। यह संक्रमण या कॉर्नियल चोट का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
होली की खुशियां तभी पूरी मानी जाएंगी, जब स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से आंखों को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है, ताकि त्योहार की यादें खुशनुमा रहें, तकलीफ भरी नहीं।













