
राजस्थान में लंबे समय से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब राज्य सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने ऐलान किया है कि प्रदेश में 27 हजार नए डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी, जिससे राज्य के दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
छोटे अस्पतालों तक पहुंचेंगे चिकित्सक, दो सप्ताह में होंगे 1700 डॉक्टर तैनात
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर छोटे से छोटे सरकारी अस्पताल में भी योग्य चिकित्सक मौजूद हों। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विभाग में अब तक 24 हजार से अधिक नियुक्तियां हो चुकी हैं, जिनमें डॉक्टरों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ और फार्मासिस्ट भी शामिल हैं। यह भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी पोर्टल के माध्यम से पूरी की गई है और आगे भी इसी तरह की पारदर्शिता बरती जाएगी।
जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री खींवसर ने बताया कि हाल ही में 350 अतिरिक्त डॉक्टरों को विभिन्न जिलों में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, अगले दो हफ्तों में 1700 नए डॉक्टरों को सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त किया जाएगा। यह नियुक्तियां राज्य के ट्रॉमा सेंटर्स सहित उन सभी संस्थानों पर की जा रही हैं जहां डॉक्टरों की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा रही थी।
आज़ादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी भर्ती, साल के अंत तक 50 हजार भर्तियों का लक्ष्य
चिकित्सा मंत्री ने दावा किया कि राज्य के इतिहास में आजादी के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
सरकार का इरादा सिर्फ डॉक्टरों तक ही सीमित नहीं है। मंत्री ने बताया कि 2025 के अंत तक कुल 50 हजार स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती की जाएगी, जिसमें नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देना और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है।
राजस्थान सरकार की यह घोषणा प्रदेश के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है। अगर यह भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी होती है, तो इससे न केवल अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी बल्कि आम लोगों को बेहतर इलाज और सुविधाएं भी सुलभ हो सकेंगी। अब देखना यह होगा कि यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है।














