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दिल्ली में चला बुलडोजर, शालीमार बाग में 300 से अधिक मकानों पर कार्रवाई; सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हो रही तोड़फोड़

दिल्ली के शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत 300 से अधिक मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। जानिए पूरी वजह और परियोजना की अहम जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 31 May 2026 8:46:10

दिल्ली में चला बुलडोजर, शालीमार बाग में 300 से अधिक मकानों पर कार्रवाई; सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हो रही तोड़फोड़

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नॉर्थ-वेस्ट इलाके शालीमार बाग में रविवार तड़के बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन ने सुबह करीब चार बजे से मैक्स हॉस्पिटल रोड के आसपास बने मकानों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया। इलाके में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों के जवान भी रात से ही मौके पर मौजूद रहे।

प्रशासन की इस कार्रवाई के तहत करीब 300 मकानों को गिराया जाना है। इनमें कई बहुमंजिला और वर्षों पुराने आवासीय भवन शामिल हैं। बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से मकानों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

सड़क विस्तार परियोजना के लिए हटाए जा रहे मकान

जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई मैक्स हॉस्पिटल रोड के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सड़क क्षेत्र में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते सड़क को विस्तारित करने की योजना बनाई गई है। इसी योजना के रास्ते में आने वाले निर्माणों को हटाया जा रहा है।

सड़क चौड़ी होने के बाद आउटर रिंग रोड से आजादपुर मंडी तक यातायात का आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा। प्रस्तावित परियोजना के तहत संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर और आजादपुर मंडी के बीच सीधा संपर्क मार्ग विकसित किया जाएगा, जिससे भारी वाहनों और माल परिवहन को भी सुविधा मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

अदालतों से नहीं मिली कोई राहत

सड़क विस्तार योजना की घोषणा के बाद प्रभावित मकान मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन ने उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने मकान खाली करने के निर्देश दिए थे। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 30 मई 2026 तक भवन खाली कर दिए जाएं।

हालांकि, प्रभावित परिवारों ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। पहले मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गईं। लेकिन दोनों अदालतों से मकान मालिकों को कोई राहत नहीं मिल सकी। न्यायालयों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

निर्धारित समय सीमा के बाद शुरू हुई कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी प्रभावित लोगों को तय समय तक मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद कई परिवारों ने अपने घरों से सामान निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट होना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने स्वेच्छा से मकान खाली कर दिए, जबकि कुछ परिवार अंतिम समय तक अपने घरों में डटे रहे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई मकानों में अभी भी कुछ घरेलू सामान मौजूद है। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने रविवार सुबह से ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और आम लोगों की आवाजाही पर भी आंशिक नियंत्रण लगाया गया है।

फिलहाल प्रशासनिक टीमों की निगरानी में बुलडोजर लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है। वहीं प्रभावित परिवारों के लिए यह अभियान चिंता और परेशानी का कारण बना हुआ है। आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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