
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा और बूंदी जिलों में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान और कृषि उपज मंडियों में खुले में रखे अनाज के भीगने की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसी स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाने और उपज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएं।
मंडियों में अनाज की सुरक्षा पर जोर
ओम बिरला ने दोनों जिलों के जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि मंडियों में रखे अनाज और फसलों को बारिश से बचाने के लिए तुरंत प्रभावी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि “मंडियों में पर्याप्त तिरपाल, पक्के शेड और जल निकासी की सुदृढ़ व्यवस्था की जाए ताकि किसानों की मेहनत पर पानी न फिर जाए।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी प्रभावित किसानों को हरसंभव सहयोग और सहायता प्रदान की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
लोकसभा अध्यक्ष ने कलेक्टरों को चेताया कि कार्रवाई में देरी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने आदेश दिया कि कृषि विभाग, विपणन बोर्ड और मंडी समितियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर राहत और सुरक्षा की प्रभावी व्यवस्था तुरंत लागू की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि “अगर मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं है, तो किसानों को परेशानी से बचाने के लिए अस्थायी रूप से फसल खरीद प्रक्रिया पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।”
मंडी समितियों पर जिम्मेदारी तय
ओम बिरला ने अपने निर्देश में स्पष्ट कहा कि “किसानों की उपज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर किसी तरह की लापरवाही या उपज को नुकसान की स्थिति सामने आती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित मंडी समिति की होगी।” उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंडी समितियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
मौसम विभाग की चेतावनियों पर सतर्कता बरतने के निर्देश
लोकसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाए और बारिश या प्राकृतिक विपदाओं की स्थिति में पहले से तैयारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि “किसानों को न्यूनतम नुकसान हो — यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन को हर स्तर पर संवेदनशील और तत्पर रहना चाहिए।”














