
जयपुर। देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में चर्चा में आए निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने समरावता हिंसा मामले में मीणा की तीसरी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया, जिससे नरेश मीणा की आठ माह बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट में तीसरी बार मिली राहत
नरेश मीणा ने हाईकोर्ट में तीसरी बार जमानत याचिका दायर की थी, जिसे इस बार स्वीकार कर लिया गया। उनके अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना के चलते झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि न तो नरेश मीणा की घटना में कोई सीधी भूमिका थी, न ही उन्होंने किसी को उपद्रव के लिए उकसाया। याचिका में यह भी बताया गया कि मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि प्रकरण में 144 गवाहों के बयान अभी बाकी हैं, जिससे मुकदमे में लंबा समय लग सकता है।
राज्य सरकार ने जताई थी आपत्ति
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि समरावता में हुई हिंसा के पीछे नरेश मीणा की भूमिका प्रमुख रही है। सरकार का दावा था कि उन्हीं के कहने पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सरकारी वाहन जलाए गए। हिंसा में 27 पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं और 42 वाहन जला दिए गए थे। सरकार ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने का आदेश दे दिया।
13 नवंबर से थे जेल में बंद
गौरतलब है कि नरेश मीणा 13 नवंबर 2024 से जेल में बंद थे। समरावता हिंसा के दौरान उनके खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। यह हिंसा उस समय हुई जब देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव के ग्रामीणों ने वोटिंग का बहिष्कार किया था और नरेश मीणा उनके साथ धरने पर बैठे थे। इसी दौरान एसडीएम अमित चौधरी से उनकी बहस हुई और उन्होंने कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। इसके बाद गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई थी।
पूर्व में थप्पड़ मामले में भी मिली थी जमानत
इससे पहले मई 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को एसडीएम थप्पड़ मामले में जमानत दे दी थी, लेकिन समरावता हिंसा केस के चलते वह जेल में ही रहे। अब इस मामले में भी राहत मिलने के बाद मीणा को निचली अदालत में जमानत और मुचलका भरने के बाद रिहा किया जाएगा।
राजनीतिक समर्थन और प्रदर्शन
नरेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ कई बार प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई को विधानसभा घेराव की भी घोषणा की गई थी। समर्थकों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया है। अब जब उन्हें कोर्ट से राहत मिली है, तो उनके समर्थकों में भी उत्साह देखा जा रहा है।














