
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा–2022 के अर्थशास्त्र विषय के पेपर लीक मामले में एसओजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार शिक्षकों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर लीक पेपर को परीक्षा से पहले पढ़कर पास होने और फिर उसी के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है। एसओजी ने इन चारों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
गिरफ्तार शिक्षक कौन हैं और कहां तैनात हैं?
एसओजी-एटीएस के अतिरिक्त महानिदेशक वी.के. सिंह ने बताया कि जिन चार शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम और विवरण इस प्रकार हैं:
रोशन बांगड़वा – जयपुर जिले के मुंडियागढ़ की रहने वाली है और वर्तमान में नागौर जिले के बासनी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अर्थशास्त्र की प्राध्यापक के पद पर कार्यरत है।
वैदेही मीणा – दौसा जिले के ब्रह्मबाद निवासी है और चित्तौड़गढ़ जिले के जाश्मा की राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में लेक्चरर है।
ओमप्रकाश – जोधपुर जिले के भीमसागर का निवासी है और नागौर जिले के पांचौड़ी में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नियुक्त है।
पदमा – बाड़मेर जिले के सेड़वा की रहने वाली है और बाड़मेर जिले के सनावड़ा की राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में अर्थशास्त्र की प्राध्यापक है।
जयपुर और जोधपुर में पढ़ा गया लीक पेपर, फिर दी परीक्षा, 14 जुलाई तक रिमांड
एसओजी की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि जयपुर और जोधपुर में परीक्षा से पहले इन चारों ने लीक हुआ पेपर पढ़ा। रोशन बांगड़वा और वैदेही मीणा ने जयपुर में पेपर की तैयारी की थी, जबकि ओमप्रकाश और पदमा ने जोधपुर में पेपर पढ़ा और बाद में परीक्षा दी। इसी आधार पर वे चयनित हुए और सरकारी सेवा में नियुक्त भी हो गए।
एसओजी ने इन चारों को अदालत में पेश कर 14 जुलाई तक रिमांड पर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इनसे पेपर लीक नेटवर्क, स्रोत और अन्य लाभार्थियों को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि किस माध्यम से इन उम्मीदवारों तक लीक पेपर पहुंचाया गया, और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अब तक 14 गिरफ्तार, कई और गिरफ्तारियां संभावित
एसओजी इस पूरे मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले भी कई उम्मीदवारों और पेपर उपलब्ध कराने वाले एजेंटों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें शामिल लोगों का नेटवर्क और भी विस्तृत होता जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था की नींव को हिलाने वाले इस घोटाले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली और सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। जो शिक्षक खुद अनुचित माध्यमों से चयनित हुए हों, उनसे देश की भावी पीढ़ी को नैतिक शिक्षा की अपेक्षा कैसे की जा सकती है? अब सभी की नजरें इस पर हैं कि एसओजी कब तक पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर पाती है और दोषियों को सख्त सजा दिला पाती है।














