
राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थस्थल खाटूश्यामजी में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने भक्तों के दिलों को झकझोर दिया। तेज बारिश से भीगते हुए जब एक श्रद्धालु परिवार ने कुछ पल की राहत पाने के लिए एक दुकान के नीचे आसरा लिया, तो उन्हें ऐसा बर्ताव झेलना पड़ा जिसकी उम्मीद किसी भक्त को नहीं होती। स्थानीय व्यापारियों ने उन भोले-भाले श्रद्धालुओं के साथ न केवल बहस की, बल्कि लाठियों और डंडों से जमकर मारपीट कर डाली।
बारिश में भीगते भक्तों को नहीं मिला सहारा
शुक्रवार की सुबह से ही खाटूधाम में तेज बारिश हो रही थी। दूर-दराज से बाबा श्याम के दर्शन करने आए भक्त भीगते हुए मंदिर परिसर में पहुंचे। उसी दौरान एक श्रद्धालु परिवार ने बारिश से बचने के लिए श्याम कुंड दर्शन के बाद एक दुकान के नीचे खड़े होने की कोशिश की। लेकिन दुकानदार ने उन्हें झिड़कते हुए बाहर निकल जाने को कहा।
किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी ऐसी बेरहमी की
परिवार ने नम्रता से आग्रह किया कि बारिश थम जाए तो वे तुरंत निकल जाएंगे, लेकिन दुकानदार का रवैया बेहद अमानवीय था। कुछ ही पल में कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और दुकानदार ने न सिर्फ धक्का-मुक्की शुरू की, बल्कि श्रद्धालुओं पर लाठियों से वार भी कर दिया। वहां मौजूद अन्य भक्तों ने घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।
घायल हुए भक्तों में महिलाएं भी शामिल
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस हमले में महिलाओं के हाथों में गंभीर चोटें आई हैं। वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि शरण मांगने वालों के साथ इस तरह का बर्ताव आखिर कैसे सही ठहराया जा सकता है?
पुलिस ने कहा- मामला दर्ज नहीं, फिर भी कार्रवाई संभव
थाना प्रभारी एचएम श्रवण सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं कराया है। लेकिन अगर शिकायत नहीं भी की गई तो पुलिस स्वयं संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। स्थानीय व्यापार मंडल ने भी घटना की निंदा की है और दोषी दुकानदार पर कठोर कदम उठाने की मांग की है।
धार्मिक स्थलों पर ऐसा व्यवहार बेहद शर्मनाक
बाबा श्याम के दरबार में आए भक्तों के साथ इस तरह की हिंसा न केवल मानवीयता के विरुद्ध है, बल्कि खाटूधाम की गरिमा पर भी सवाल उठाती है। श्रद्धालु उम्मीद करते हैं कि जहां वे आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहां कम से कम उन्हें सम्मान और सहारा मिलेगा। लेकिन इस घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं न कहीं हमारी संवेदनाएं धीरे-धीरे खोती जा रही हैं।














