
जयपुर: राजधानी जयपुर में साइबर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संचालित हो रहे सट्टेबाजी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जो किराए के कमरे से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में इस अवैध कारोबार के तार दुबई और नेपाल तक जुड़े होने का खुलासा हुआ है। पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय लिंक और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में चार नागौर जिले के और एक चूरू जिले का निवासी बताया गया है। सभी आरोपी जयपुर में रहकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित मॉड्यूल है, जो सीमाओं के पार बैठे संचालकों के निर्देश पर काम कर रहा था।
जयपुर (पश्चिम) के डीसीपी हनुमान प्रसाद मीणा के अनुसार, साइबर टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर इस गिरोह का खुलासा किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अनूप पारीक (खेड़ी, नागौर), अब्दुल करीम (बड़ी खाटू, नागौर), श्रवण कुमार मेघवाल (डावोली मीठी, नागौर), सुनील कुमार (बड़ी खाटू, नागौर) और सिद्धार्थ पारीक (चूरू) के रूप में हुई है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आने के बाद भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (I4C) से भी तालमेल किया जा रहा है।
डिजिटल सबूत और बैंकिंग दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 85 हजार रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक आईपैड, 9 बैंक पासबुक, 12 एटीएम कार्ड और 3 क्रेडिट कार्ड बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन और साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस को ऐसे प्रमाण भी मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि गिरोह इन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए धन का ट्रांसफर करता था।
कमीशन मॉडल पर चलता था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी एक विशेष ऐप के माध्यम से लोगों को सट्टा खेलने के लिए जोड़ते थे। प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर उन्हें तय कमीशन मिलता था, जबकि बड़ी राशि आगे नेपाल और दुबई स्थित संचालकों को भेजी जाती थी। यह पूरा नेटवर्क ऑनलाइन गेमिंग का मुखौटा पहनकर अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा दे रहा था।
पुलिस पूछताछ में यह भी पता चला है कि आरोपी पिछले डेढ़ से दो महीने से सक्रिय थे। वे लोगों से बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें रकम ट्रांसफर करवाते थे, ताकि असली स्रोत छिपा रहे। जिन खाताधारकों के बैंक दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनसे भी अब पूछताछ की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं और देश के किन-किन हिस्सों में इसका जाल फैला हुआ है।














