
जयपुर। साइबर अपराधियों ने अब कॉल फॉरवर्डिंग की तकनीक को ठगी का नया ज़रिया बना लिया है। राजस्थान पुलिस मुख्यालय की साइबर विंग ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए आम जनता को सतर्क रहने की अपील की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि कैसे अपराधी *21 से शुरू होने वाले नंबर डायल करवा कर आपके मोबाइल नंबर को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं और फिर बैंक खातों से लेकर सोशल मीडिया तक आपकी पहचान का दुरुपयोग करते हैं।
कैसे होता है यह साइबर फ्रॉड?
एसपी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार के अनुसार, साइबर अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम या लिंक्डइन से आपके निजी विवरण जुटाते हैं — जैसे जन्मतिथि, शादी की सालगिरह या पारिवारिक सदस्य। इसके बाद वे कॉल या व्हाट्सएप कॉल करके खुद को पार्सल एजेंसी, डिलीवरी बॉय या बैंक कर्मी बताकर आपसे संपर्क करते हैं।
वे बातचीत के दौरान विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं और फिर किसी तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर आपसे एक कोड डायल करवाते हैं — जो *21 से शुरू होकर # पर खत्म होता है। दरअसल यह एक कॉल फॉरवर्डिंग कोड होता है, जो आपके फोन पर आने वाली सभी कॉल्स को साइबर अपराधी के नंबर पर फॉरवर्ड कर देता है।
ओटीपी और कॉल तक पहुंच, फिर सोशल मीडिया से लेकर बैंक अकाउंट तक सेंध
एक बार जब कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिवेट हो जाती है, तो ठग आपके फोन नंबर पर आने वाली ओटीपी, कॉल और मैसेज को अपने पास रिसीव कर सकते हैं। इसका उपयोग वे आपके सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक करने और आपके नाम पर आपके परिचितों से पैसे मांगने में करते हैं।
अगर आपके जीमेल या बैंक से जुड़ी सेवाओं में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन नहीं लगा है, तो वे आपके बैंक खातों तक भी पहुंच बना सकते हैं और ट्रांजेक्शन कर सकते हैं — बिना आपकी जानकारी के।
सावधानी और सुरक्षा के लिए करें ये जरूरी उपाय
साइबर विंग ने इस खतरे से बचाव के लिए आमजन को कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:
1. जीमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) तुरंत एक्टिव करें।
2. अनजान नंबर से कॉल आए तो सतर्क रहें। शक होने पर कॉल को तुरंत व्हाट्सएप पर रिपोर्ट करें और अपने बैंक को सूचित करें।
3. कभी भी ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
4. *21 से शुरू होने वाला कोई भी कोड डायल न करें, चाहे कोई भी कारण बताया जाए।
5. यदि कॉल या लिंक संदिग्ध लगे, तो चक्षु पोर्टल (https://www.sancharsaathi.gov.in/sfc/) पर रिपोर्ट करें।
6. साइबर अपराध की शिकायत के लिए तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन रिपोर्ट करें।
7. निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में लिखित सूचना अवश्य दें।
अंतिम चेतावनी: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ठगी तकनीकी रूप से इतनी सटीक होती है कि आमजन को इसका पता तक नहीं चलता, जब तक नुकसान न हो जाए। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल, ओटीपी अनुरोध या लिंक को गंभीरता से लें और सतर्क रहें।














