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‘2 साल बनाम 5 साल’ की बहस पर गहलोत का तंज, बोले- आजादी के बाद ऐसी मूर्खता किसी सरकार ने नहीं की

जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ की बहस को निरर्थक बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं, विपक्ष की भूमिका, आंकड़ों की सियासत और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 23 Feb 2026 3:44:31

‘2 साल बनाम 5 साल’ की बहस पर गहलोत का तंज, बोले- आजादी के बाद ऐसी मूर्खता किसी सरकार ने नहीं की

जयपुर में राजनीतिक बयानबाज़ी उस समय तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ की चर्चा को लेकर मौजूदा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इस बहस को पूरी तरह निरर्थक बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने इस तरह का तर्क प्रस्तुत नहीं किया। सोमवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने साफ शब्दों में कहा कि यह तुलना न तो संवैधानिक परंपराओं के अनुरूप है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादाओं के।

उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने इस मुद्दे पर हामी भरी और बाद में यह कहकर पीछे हट गई कि चर्चा केवल प्रतिवेदन पर होगी। गहलोत के अनुसार, इस तरह की उलझन भरी स्थिति खुद सरकार की अस्थिर सोच को दर्शाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दो वर्षों के कामकाज की तुलना पांच साल के कार्यकाल से किस आधार पर की जा रही है।

“जनता के बीच जाए सरकार”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार को अपने काम पर भरोसा है तो उसे जनता के बीच जाकर वास्तविक प्रतिक्रिया लेनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा के दो साल के शासन को लेकर असंतोष है और जमीनी स्तर पर हालात संतोषजनक नहीं हैं। गहलोत ने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री को सुझाव दिया था कि वे सीधे जनता से संवाद करें और फीडबैक लें, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

आंकड़ों की सियासत पर उठाए सवाल

गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार जिन उपलब्धियों का दावा कर रही है, उनमें से कई परियोजनाएं पिछली कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत हुई थीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने योजनाओं की घोषणा की, वित्तीय मंजूरी दी, टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाई और कार्य आरंभ कराया। अब उन्हीं परियोजनाओं को वर्तमान सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोचिंग हब जैसी पहल उनके कार्यकाल में शुरू की गई थी।

उनका यह भी कहना था कि कई योजनाएं जो कांग्रेस शासन में शुरू हुई थीं, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या फिर अधर में छोड़ दिया गया है। कुछ परियोजनाएं पूरी होने के बावजूद चालू नहीं की जा रही हैं, जिससे युवाओं और आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। गहलोत ने कहा कि यदि ये योजनाएं सही ढंग से लागू हों तो प्रदेश को बड़ा फायदा हो सकता है।

लोकतंत्र को लेकर जताई चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विपक्ष मुक्त भारत’ वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक दिशा को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक संस्थाएं जैसे चुनाव आयोग, न्यायपालिका और प्रशासनिक तंत्र दबाव में काम करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति रही तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हो सकती है।

गहलोत ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्वस्थ विपक्ष का होना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि कुछ देशों में चुनाव होते जरूर हैं, लेकिन वहां लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा सीमित होती है। भारत को उस राह पर नहीं जाना चाहिए। उनके अनुसार, जनता को जागरूक रहकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी।

‘विपक्ष खत्म होगा तो सत्ता का क्या अर्थ?’ गहलोत का केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा प्रहार

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री के हालिया कथनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले “कांग्रेस मुक्त भारत” की बात की जाती थी और अब “विपक्ष मुक्त भारत” की चर्चा हो रही है। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि यदि देश में विपक्ष ही नहीं रहेगा, तो फिर सत्तापक्ष के अस्तित्व का भी क्या औचित्य रह जाएगा। लोकतंत्र की मजबूती सत्ता और विपक्ष दोनों की सक्रिय भूमिका से होती है।

उन्होंने संसद के पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में भी कई बार गतिरोध की स्थिति बनी थी। एक अवसर पर 18 दिनों तक सदन की कार्यवाही बाधित रही, लेकिन तब किसी विपक्षी सांसद को निलंबित नहीं किया गया। गहलोत के अनुसार, उस समय संवाद की परंपरा अपनाई जाती थी। संसदीय कार्य मंत्री स्वयं विपक्ष के नेताओं से मिलते, उन्हें समझाते और स्पीकर के कक्ष में बैठकर चर्चा के जरिए समाधान निकाला जाता था। बातचीत के बाद ही सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होती थी।

किरण रिजिजू के बयान पर आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के उस बयान पर भी कड़ा विरोध जताया, जिसमें उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्र के लिए खतरा बताया था। गहलोत ने कहा कि इस तरह की भाषा से समाज में गलत संदेश जाता है और असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जब कोई सार्वजनिक रूप से इस तरह के आरोप लगाता है, तो कुछ लोग उसे गंभीरता से लेकर उग्र बयानबाजी या हिंसक सोच की ओर बढ़ सकते हैं।

इतिहास की घटनाओं से तुलना

गहलोत ने देश के मौजूदा माहौल को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसा ही वातावरण अतीत में भी तैयार किया गया था, जिसके परिणाम बेहद दुखद रहे। उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि नफरत और वैमनस्य का माहौल लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी का परिवार देश के लिए अनेक बलिदान दे चुका है—पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

लोकसभा अध्यक्ष पर भी टिप्पणी

गहलोत ने राजस्थान से दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बने ओम बिरला के व्यवहार पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता और विपक्ष के बीच स्वस्थ संवाद की परंपरा रही है और इसे बनाए रखना आवश्यक है। उनके मुताबिक सदन में गरिमा और संतुलन कायम रहना चाहिए, ताकि जनता की समस्याओं पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा हो सके।

गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा न होने पर आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं कराई जा रही, जबकि विपक्ष ने इस पर विस्तार से बहस की मांग की थी। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे चिंताजनक हैं। गहलोत के अनुसार, दो वर्षों में 13 हजार से अधिक दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

गहलोत ने जोर देकर कहा कि यदि गृह विभाग पर खुली चर्चा होती, तो सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों से उपयोगी सुझाव सामने आते। इससे सुशासन की दिशा में बेहतर निर्णय लिए जा सकते थे। उनके मुताबिक लोकतंत्र में बहस और विमर्श से ही नीतियां मजबूत बनती हैं और जनता का विश्वास कायम रहता है।

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