मध्य प्रदेश के उज्जैन में नागपंचमी के मौके पर प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते हालात बिगड़ गए। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के साथ हरसिद्धि मंदिर और बड़े गणेश मंदिर के आसपास भी बड़ी संख्या में दर्शनार्थी मौजूद थे। इसी दौरान मंदिर मार्ग पर भीड़ का दबाव बढ़ने से धक्का-मुक्की शुरू हो गई और अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में दबने के कारण तीन लोग घायल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। घायल श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
नागपंचमी पर ही खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खासियत यह है कि मंदिर के कपाट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं और वर्ष में सिर्फ नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए दर्शन के लिए खोले जाते हैं।
इसी वजह से नागपंचमी के दिन यहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन का यह सीमित अवसर होने के कारण पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।
11वीं शताब्दी की प्रतिमा है मंदिर की खास पहचान
नागचंद्रेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा को 11वीं शताब्दी का बताया जाता है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती को विशाल शेषनाग के फनों के नीचे विराजमान दिखाया गया है। प्रतिमा में भगवान गणेश भी दिखाई देते हैं।
इस प्रतिमा को अपनी तरह का अनूठा स्वरूप माना जाता है। मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक विशेषताओं के चलते नागपंचमी पर यहां दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
राजा भोज के शासनकाल से जुड़ा इतिहास
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस प्रतिमा की स्थापना करीब 1050 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज के शासनकाल के दौरान हुई थी। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नागों के राजा तक्षक ने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी।
मंदिर से जुड़ी इन ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण इसका धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के बीच काफी अधिक है।
नागपंचमी पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन खुलने के कारण नागपंचमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस दिन नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष, सर्प दोष और अन्य ग्रह संबंधी नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं। यह धार्मिक मान्यता है, जिसका श्रद्धालु आस्था के साथ पालन करते हैं।
इस बार भी श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के बीच मंदिर मार्ग पर भीड़ का दबाव बढ़ गया, जिसके बाद धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हुई और तीन श्रद्धालु घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।














