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ACB कार्यालय पहुंचे किरोड़ी लाल मीणा, बोले- 'या तो क्लीन चिट दो, नहीं तो गिरफ्तार करो'

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा अचानक ACB कार्यालय पहुंचे और जांच एजेंसी पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ सबूत हैं तो गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा उन्हें क्लीन चिट दी जाए। मामले ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 20 Jun 2026 9:18:45

ACB कार्यालय पहुंचे किरोड़ी लाल मीणा, बोले- 'या तो क्लीन चिट दो, नहीं तो गिरफ्तार करो'

राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को उस समय असामान्य स्थिति देखने को मिली जब राज्य सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अचानक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के कार्यालय पहुंच गए। अपनी ही सरकार की जांच एजेंसी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस आधार है तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा सार्वजनिक रूप से उन्हें निर्दोष घोषित किया जाए।

कथित नकली बीज फैक्ट्रियों से जुड़े उगाही प्रकरण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच डॉ. मीणा खुद एसीबी कार्यालय पहुंचे और गिरफ्तारी देने की पेशकश कर दी। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में न तो उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज हुई है और न ही जांच एजेंसी ने उन्हें आरोपी के तौर पर नामित किया है। इसके बावजूद उनका एसीबी दफ्तर पहुंचना और वहां डटे रहना पूरे दिन राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना रहा।

‘डॉक्टर और मंत्री’ वाली टिप्पणी से बढ़ा विवाद

एसीबी मुख्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हाल ही में दर्ज एक मामले के बाद मीडिया के सामने यह बात कही गई कि जांच में एक “डॉक्टर और मंत्री” की भूमिका सामने आ रही है।

मीणा ने इस बयान को सीधे तौर पर अपनी ओर इशारा बताया। उन्होंने कहा कि वह पेशे से डॉक्टर भी हैं और वर्तमान में मंत्री भी हैं, ऐसे में स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में संदेह उन्हीं पर जाएगा। मंत्री का आरोप है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

कृषि मंत्री ने केवल बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि एसीबी की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी की कार्रवाई और उसके बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि किसी सुनियोजित रणनीति के तहत उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

डॉ. मीणा ने दावा किया कि पूरा घटनाक्रम उनके खिलाफ माहौल बनाने के उद्देश्य से रचा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच किसी मौजूदा हाईकोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और सभी संदेह दूर हों।

उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करते, तब तक वह कार्यालय से वापस नहीं लौटेंगे। जानकारी के अनुसार, मंत्री काफी समय तक एसीबी कार्यालय में मौजूद रहे और अधिकारियों से जवाब मांगते रहे।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

एक मंत्री का अपनी ही सरकार की जांच एजेंसी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से इस तरह खड़ा होना कई नए सवाल खड़े कर रहा है। खासतौर पर तब, जब उनके खिलाफ कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं है और न ही उन्हें जांच में आरोपी बनाया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सत्ता तंत्र के भीतर चल रही किसी आंतरिक खींचतान की झलक भी दिखाई दे सकती है। हालांकि डॉ. मीणा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके अनुसार उनके खिलाफ साजिश रचने वाले लोग कौन हैं या यह कथित प्रयास किस स्तर पर किया जा रहा है।

इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक पक्ष इसे मंत्री की ओर से अपनी छवि बचाने और दबाव की राजनीति करने की रणनीति मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे उनके खिलाफ किसी बड़े राजनीतिक खेल की आशंका से जोड़कर देख रहा है।

छापेमारी अभियानों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

गौरतलब है कि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पिछले कुछ महीनों से कृषि विभाग से जुड़े मामलों में लगातार सक्रिय नजर आए हैं। उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों में नकली बीज, खाद और कृषि सामग्री से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ कई छापेमारी अभियान चलाए हैं।

हालांकि उनकी इन कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। विपक्षी दल कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं कि मंत्री द्वारा लगातार कार्रवाई किए जाने के बावजूद अब तक बड़े स्तर पर दोषियों के खिलाफ निर्णायक और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी है।

करीब पंद्रह दिन पहले कृषि विभाग के राज्य बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर और उनके एक सहयोगी को बड़ी मात्रा में नकदी के साथ पकड़े जाने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। यह कार्रवाई भी एसीबी ने ही की थी।

उस मामले में आरोप लगाए गए थे कि जुगल किशोर कथित रूप से उन कारोबारियों और बीज माफियाओं को राहत दिलाने के नाम पर धनराशि वसूलते थे, जिनके खिलाफ मंत्री की टीम ने कार्रवाई की थी। अब ताजा विवाद और मंत्री के एसीबी कार्यालय पहुंचने के बाद इस पूरे प्रकरण ने नया राजनीतिक रंग ले लिया है। राजस्थान की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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