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कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का बदला नाम, शुभेंदु बोले- ऐतिहासिक फैसला; कांग्रेस ने उठाए सवाल

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे ऐतिहासिक भूल का सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने नाम परिवर्तन को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल उठाए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 22 Jun 2026 8:48:15

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का बदला नाम, शुभेंदु बोले- ऐतिहासिक फैसला; कांग्रेस ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक प्रमुख सड़क के नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कोलकाता नगर निगम ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए स्वागत किया है, जबकि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधा है।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ‘पश्चिमबंग दिवस’ के अवसर पर लिया गया यह निर्णय वर्षों पुरानी एक ऐतिहासिक भूल को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार जिस व्यक्ति के नाम पर पहले सड़क का नाम था, उस पर इतिहास में गंभीर आरोप जुड़े रहे हैं, जबकि नए नाम से सम्मानित किए जा रहे गोपाल मुखर्जी को संकट के दौर में लोगों की रक्षा करने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कोलकाता नगर निगम का यह फैसला लंबे समय से चली आ रही ऐतिहासिक विसंगति को दूर करेगा। उन्होंने लिखा कि अब सुहरावर्दी एवेन्यू की जगह गोपाल मुखर्जी रोड नाम अपनाया जाएगा, जो बंगाल के इतिहास के एक अलग और महत्वपूर्ण अध्याय को सम्मान देने का प्रयास है।

'अब असली नायकों को सम्मान देने का समय'

शुभेंदु अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि कई दशकों तक शहर की एक प्रमुख सड़क ऐसे व्यक्ति के नाम पर रही, जिसे लेकर इतिहास में विवाद और आलोचनाएं दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का उपयोग राजनीतिक हितों के लिए किया गया और निर्दोष लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

इसके विपरीत, उन्होंने गोपाल मुखर्जी को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में हजारों लोगों की सुरक्षा और सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारी ने कहा कि सड़क का नाम बदलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक न्याय की दिशा में उठाया गया कदम है। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल को अब अपने वास्तविक नायकों को पहचानते हुए उन्हें उचित सम्मान देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास की गलतियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारना किसी भी समाज की परिपक्वता का प्रतीक होता है। इस निर्णय के माध्यम से राज्य अपने अतीत की कुछ विवादित विरासतों पर पुनर्विचार कर रहा है और सकारात्मक योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की कोशिश कर रहा है।

कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल

वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस सांसद और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शुभेंदु अधिकारी के बयान पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस मुद्दे में ऐतिहासिक व्यक्तियों की पहचान को लेकर भ्रम पैदा किया गया है।

पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि सड़क का नाम जिस व्यक्ति के सम्मान में रखा गया था और जिस व्यक्ति को लेकर आलोचना की जाती है, दोनों अलग-अलग ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे विवाद में नामों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी गई है।

कांग्रेस नेता के अनुसार, हसन शाहिद सुहरावर्दी एक शिक्षाविद, कला समीक्षक और कोलकाता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे, जबकि हुसैन शाहिद सुहरावर्दी एक अलग राजनीतिक व्यक्तित्व थे, जिनका नाम ऐतिहासिक विवादों में लिया जाता है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि इसी भ्रम के कारण सड़क के नाम परिवर्तन को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है।

नाम परिवर्तन पर तेज हुई राजनीतिक बहस

सड़क का नाम बदलने का यह फैसला अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है। एक पक्ष इसे ऐतिहासिक सुधार और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना का कदम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे इतिहास की गलत व्याख्या और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित निर्णय के रूप में देख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में इतिहास, पहचान और विरासत से जुड़े मुद्दे हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में सड़कों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने जैसे निर्णय अक्सर व्यापक राजनीतिक चर्चा को जन्म देते हैं। फिलहाल सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने का फैसला राज्य की राजनीति में एक नए विवाद और बहस का केंद्र बन गया है।

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