अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। विश्व सिंधी सेवा संगम ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए दान की गई 200 किलो चांदी की ईंटों के संबंध में उन्हें आज तक कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। संगठन का कहना है कि पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो दान की रसीद मिली और न ही यह बताया गया कि उन चांदी की ईंटों का उपयोग किस प्रकार किया गया।
विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल चांदी की ईंटों का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न है। उनका कहना है कि जब देश और विदेश में बसे सिंधी समाज के लोगों ने श्रद्धा के साथ यह योगदान दिया था, तब उन्हें भरोसा था कि दान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
12 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सौंपी गई थीं चांदी की ईंटें
डॉ. मनवानी के अनुसार, 26 जनवरी 2021 को दुनियाभर के सिंधी समाज के सहयोग से तैयार करवाई गई 200 चांदी की ईंटें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई थीं। इन ईंटों पर सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की तस्वीर भी अंकित थी। उस समय यह कार्यक्रम विशेष रूप से आयोजित किया गया था, जिसमें 12 देशों से आए सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
उन्होंने बताया कि अयोध्या के कारसेवक पुरम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को यह चांदी की ईंटें औपचारिक रूप से सौंपी गई थीं। इस अवसर की तस्वीरें और अन्य दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं, जो इस दान प्रक्रिया की पुष्टि करते हैं।
‘जांच के बाद रसीद देने का आश्वासन मिला था’
विश्व सिंधी सेवा संगम का दावा है कि जब चांदी की ईंटें ट्रस्ट को सौंपी गईं, तब उन्हें बताया गया था कि पहले चांदी की शुद्धता और वजन की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आधिकारिक रसीद जारी कर दी जाएगी। लेकिन संगठन का आरोप है कि कई वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें कोई रसीद नहीं मिली है।
डॉ. मनवानी का कहना है कि हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े मामलों को लेकर जो खबरें सामने आई हैं, उनसे समाज के लोगों की चिंता और बढ़ गई है। इसी वजह से अब सिंधी समाज इस मामले को लेकर सक्रिय हो गया है और जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी देगा तथा अपनी मांगें उनके सामने रखेगा।
अब आरोप लगाने वालों तक पहुंचेगी SIT की जांच
उधर, राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और अन्य दानों में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) भी अपने दायरे का विस्तार करने जा रही है। जांच एजेंसी ने पहले चरण में मंदिर प्रशासन और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की थी, लेकिन अब उन लोगों से भी सवाल-जवाब किए जाएंगे जिन्होंने सोशल मीडिया या अन्य मंचों के माध्यम से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे लोग सामने आए जिन्होंने खुद को रामजन्मभूमि परिसर का पूर्व कर्मचारी या पूर्व अधिकारी बताते हुए विभिन्न प्रकार के दावे किए। कुछ लोगों ने चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की बात कही, जबकि कुछ ने मंदिर निर्माण कार्य में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए। SIT अब इन सभी दावों की सच्चाई की जांच करना चाहती है।
दूसरे चरण की जांच में खुल सकती हैं कई नई परतें
सूत्रों के मुताबिक सोमवार से जांच का दूसरा चरण शुरू किया जा सकता है। पिछले सात दिनों के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं और विभिन्न पक्षों से पूछताछ की है। इन शुरुआती तथ्यों के आधार पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट भी तैयार की गई है, जिसे संबंधित मुख्यालय भेजा जा चुका है।
जांच के शुरुआती दौर में सबसे पहले महिपाल नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को रामजन्मभूमि का पूर्व कर्मचारी बताया था। उसने दावा किया था कि चढ़ावे की रकम में बड़े स्तर पर हेराफेरी की जा रही है। उसके आरोपों के बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आया और देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि आरोप लगाने के बाद महिपाल सार्वजनिक रूप से ज्यादा नजर नहीं आए। बताया जाता है कि उन्होंने मीडिया और अन्य लोगों के फोन कॉल तक उठाने बंद कर दिए। जबकि अपने शुरुआती बयान में उन्होंने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही थी। अब SIT यह जानने का प्रयास करेगी कि उनके आरोपों के पीछे क्या आधार था और क्या उनके पास अपने दावों के समर्थन में कोई प्रमाण मौजूद हैं।
अन्य शिकायतों की भी होगी पड़ताल
इस बीच रोकड़िया हनुमान मंदिर के पीठाधीश्वर आचार्य विनोद मिश्रा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से एक और मामला सामने रखा था। उन्होंने दावा किया था कि जौनपुर जिले के जंघई निवासी उनके शिष्य अजय विश्वकर्मा ने रामलला को एक सुंदर हार और चरण पादुका भेंट की थी। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद उस दान की कोई आधिकारिक रसीद या प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।
ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां अब प्रत्येक दावे और शिकायत की अलग-अलग जांच करने की तैयारी में हैं। अधिकारियों का मानना है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता, इसलिए सभी पक्षों से तथ्य जुटाना आवश्यक है।
कई गंभीर आरोपों के बाद बढ़ी कार्रवाई की संभावना
पिछले एक सप्ताह के दौरान सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर मंदिर निर्माण, चढ़ावे की राशि और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित सोना-चांदी सहित अन्य धातुओं के प्रबंधन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि दान में मिली वस्तुओं के रिकॉर्ड और प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी है।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दूसरे चरण में उन सभी व्यक्तियों को बुलाया जा सकता है जिन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए हैं। उनसे विस्तृत पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके दावों में कितनी सच्चाई है और क्या कोई ठोस सबूत मौजूद हैं। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेश सरकार, जांच एजेंसियों और श्रद्धालुओं की नजर बनी हुई है।













