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शिबू सोरेन: झारखंड आंदोलन के नायक, 3 बार मुख्यमंत्री और 35 साल तक सांसद रहे 'गुरुजी'

झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुजी ने दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस ली। जानिए उनके राजनीतिक सफर, पारिवारिक जीवन और झारखंड निर्माण में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Mon, 04 Aug 2025 12:20:32

शिबू सोरेन: झारखंड आंदोलन के नायक, 3 बार मुख्यमंत्री और 35 साल तक सांसद रहे 'गुरुजी'

झारखंड की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन ने 81 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार सुबह 8.56 बजे उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे 'गुरुजी' की तबीयत दो दिन पहले ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।

उनकी अंतिम सांस के साथ ही झारखंड की राजनीति का एक अध्याय शांत हो गया। उन्होंने एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर न केवल राज्य का नेतृत्व किया, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई।

परिवार में पसरा मातम

शिबू सोरेन अपने पीछे गमगीन परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पत्नी रूपी सोरेन के अलावा चार बच्चे हैं – तीन बेटे और एक बेटी। सबसे बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का निधन 2009 में हो गया था। बेटी अंजलि सोरेन सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। हेमंत सोरेन, जो झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं, पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन भी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

एक दशक में तीन बार बने मुख्यमंत्री

11 जनवरी 1944 को रामगढ़ (तत्कालीन बिहार) में जन्मे शिबू सोरेन संथाल जनजाति से ताल्लुक रखते थे। 2005 में वे पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने – भले ही ये कार्यकाल केवल 10 दिनों का रहा (2 मार्च से 12 मार्च तक), लेकिन उन्होंने झारखंड के राजनीतिक इतिहास में अपनी अहम मौजूदगी दर्ज करा दी। इसके बाद 2008-09 और फिर 2009-10 में उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी निभाई बड़ी भूमिका

‘गुरुजी’ ने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। वे तीन बार केंद्र सरकार में कोयला मंत्री रहे – 2004, 2004-05 और 2005-06 में। इससे पहले, उन्होंने 1980-84 और 1989-99 तक दुमका से लोकसभा सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद भी वे 2002 से लेकर 2019 तक लगातार सांसद रहे।

झारखंड के निर्माण में रहा अहम योगदान

शिबू सोरेन केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी नेता थे। 18 साल की उम्र में उन्होंने ‘संथाल नवयुवक संघ’ की स्थापना की और 1972 में एके रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ की नींव रखी। राज्य के लिए अलग पहचान की लड़ाई उन्होंने गांव-गांव जाकर लड़ी, जिसकी परिणति 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य के गठन में हुई।

अगली पीढ़ी से भी राजनीति में सक्रियता

शिबू सोरेन के सबसे बड़े बेटे दुर्गा सोरेन की रहस्यमयी मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था। उनकी पत्नी सीता सोरेन अब बीजेपी में हैं और तीन बेटियों की मां हैं। सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन JMM के यूथ विंग के प्रमुख हैं। बेटी अंजलि सामाजिक कार्यों में जुटी हुई हैं। हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी वर्तमान में विधायक हैं और गांडेय विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। बीटेक और एमबीए पास कल्पना दो बेटों – निखिल और अंश की मां हैं।

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