
गुजरात बोर्ड की परीक्षाओं के बीच सूरत से दो दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के दबाव पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। केमिस्ट्री का पेपर अपेक्षा के अनुरूप न जाने से तनाव में आए 12वीं के एक छात्र और एक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। ये मामले सूरत के बारडोली और डिंडोली इलाकों से जुड़े हैं। दोनों परिवारों में मातम पसरा है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
बारडोली की घटना: पेपर के बाद घर लौटी छात्रा ने उठाया कदम
पुलिस के अनुसार पहली घटना शनिवार (28 फरवरी) की है। 20 वर्षीय खुशी, जो महाराष्ट्र मूल की बताई जा रही है, बारडोली चीनी सहकारी कारखाने में कार्यरत एक कर्मचारी की बेटी थी। वह बाबेन गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी और इस बार 12वीं की परीक्षा दोबारा दे रही थी।
शनिवार को केमिस्ट्री का पेपर देकर वह घर लौटी। परिजनों के मुताबिक वह पेपर को लेकर चिंतित थी। शाम के समय जब घर में कोई मौजूद नहीं था, तब उसने आत्महत्या कर ली। माता-पिता के लौटने पर घटना का पता चला और उन्होंने तुरंत बारडोली पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में परीक्षा के तनाव को एक कारण माना जा रहा है।
डिंडोली में दूसरा मामला: परिणाम को लेकर चिंता में था छात्र
दूसरी घटना डिंडोली क्षेत्र से सामने आई। 19 वर्षीय विलास प्रह्लाद पाटिल, जो महाराष्ट्र का रहने वाला था, ने शनिवार रात घर पर ही आत्महत्या कर ली। उसका अगला पेपर सोमवार (2 मार्च) को निर्धारित था। परिजनों के अनुसार वह पढ़ाई कर रहा था, लेकिन केमिस्ट्री का पेपर उम्मीद के मुताबिक न जाने से परेशान था।
रविवार (1 मार्च) सुबह जब परिवार के सदस्य जागे तो घटना का पता चला। पुलिस को दी गई जानकारी में बताया गया कि छात्र ने अपनी मां से कहा था कि उसका केमिस्ट्री का पेपर अच्छा नहीं हुआ है और वह इसे लेकर बेहद तनाव में है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परीक्षा दबाव पर फिर उठे सवाल
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर बोर्ड परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सूरत में इस वर्ष गुजरात राज्य शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं के लिए 1 लाख 62 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा परिणाम से जुड़ी चिंता कई छात्रों के लिए मानसिक बोझ बन जाती है।
पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। परिजनों से पूछताछ के साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी अन्य कारण ने भी इन कदमों को प्रभावित किया। इन घटनाओं ने अभिभावकों और शिक्षकों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को कैसे संतुलित किया जाए, ताकि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों।














