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गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आए शी जिनपिंग, PM मोदी से बोले- 'आइए, हम साथ मिलकर काम करें'

गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत पहुंचे शी जिनपिंग ने PM मोदी से मुलाकात में भारत-चीन संबंधों, BRICS सहयोग और आपसी सम्मान पर जोर दिया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 12 Sep 2026 9:56:34

गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आए शी जिनपिंग, PM मोदी से बोले-  'आइए, हम साथ मिलकर काम करें'

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। गलवान झड़प के बाद उनका यह भारत का पहला दौरा है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान जिनपिंग ने भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में दोनों देशों की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत को अपने लोगों की भलाई और मानवता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए BRICS के व्यापक ढांचे के भीतर उच्च गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया तथा समावेशी और आपसी लाभ वाले आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करने की बात भी कही। उनके मुताबिक, इससे विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में संबंधों की प्रगति पर चर्चा


भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए।

बैठक में दोनों देशों के बीच मतभेदों को लेकर भी स्पष्ट रुख सामने आया। दोनों पक्षों ने कहा कि मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान तीन 'आपसी' बातों के महत्व पर जोर दिया। इनमें आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को सर्वोपरि रखना शामिल है।

मोदी और जिनपिंग के बीच हुई बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद लगातार प्रगति की बात कही जा रही है। बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।

सात साल बाद भारत आए हैं शी जिनपिंग


शी जिनपिंग सात साल के अंतराल के बाद भारत पहुंचे हैं। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। गलवान झड़प के बाद यह उनका भारत का पहला दौरा है। वे BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।

15 जून 2020 को हुई गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था। 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 132 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

गलवान के बाद चीन से भारत का आयात दोगुने से ज्यादा

व्यापार के आंकड़े भारत-चीन आर्थिक संबंधों में जारी गतिविधियों को भी दिखाते हैं। 2020-21 में चीन से भारत का आयात लगभग 65 अरब डॉलर था, जबकि 2025-26 में यह 132 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। यानी गलवान झड़प के बाद की अवधि में चीन से भारत के आयात में करीब दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के रिश्तों को केवल मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में देखने के बजाय रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने की बात सामने आई। प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों को महत्व देने की जरूरत बताई, जबकि शी जिनपिंग ने BRICS के व्यापक मंच के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

शी ने BRICS के जरिए साथ काम करने की अपील की


शी जिनपिंग ने कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सामने आ रही विभिन्न चुनौतियों के बीच चीन और भारत की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दोनों देशों को BRICS के भीतर उच्च गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।

चीनी राष्ट्रपति ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करते हुए कहा कि भारत और चीन को विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। इस तरह उनकी टिप्पणी में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ BRICS के व्यापक सहयोग को भी प्रमुखता दी गई।

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