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मायावती ने भतीजों को बसपा से किया दूर, अब भतीजी दीपिका पर नजर? भाई आनंद को दी साफ हिदायत

मायावती ने आकाश और ईशान आनंद को बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी देने से इनकार किया है। भतीजी दीपिका को लेकर दिए संकेत से उत्तराधिकारी की चर्चा तेज हुई

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 12 Sep 2026 10:24:09

मायावती ने भतीजों को बसपा से किया दूर, अब भतीजी दीपिका पर नजर? भाई आनंद को दी साफ हिदायत

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पार्टी के भविष्य और परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को अब बसपा में कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने पार्टी के अगले नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

मायावती का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ समय से बसपा में उत्तराधिकार को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहले आकाश आनंद को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना गया था, लेकिन बाद में उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया। इसके बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने से यह चर्चा शुरू हुई थी कि मायावती शायद उन्हें आगे बढ़ा रही हैं। अब दोनों भतीजों को राजनीतिक भूमिका से बाहर रखने की घोषणा के बाद तस्वीर फिर बदलती दिखाई दे रही है।

भाई आनंद कुमार से मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार की पार्टी में लंबे समय से चली आ रही भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके साथ पार्टी के काम में सहयोग करते रहे हैं। लेकिन उनके बेटों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। मायावती ने परिवारवाद को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह बसपा को पारिवारिक संगठन नहीं बनने देंगी।

यानी मायावती ने एक तरफ अपने भाई के योगदान को स्वीकार किया है, तो दूसरी तरफ उनके बेटों के लिए पार्टी की राजनीतिक जिम्मेदारियों का रास्ता बंद करने का फैसला किया है।

दीपिका आनंद को लेकर क्यों शुरू हुई चर्चा?

मायावती के ताजा बयान में सबसे ज्यादा ध्यान उनकी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर दिए गए संकेत पर गया है। रिपोर्टों के मुताबिक मायावती ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर दीपिका अपने पिता आनंद कुमार के साथ पार्टी के काम में सहयोग कर सकती हैं। हालांकि इसके लिए उनकी कार्यक्षमता और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी को देखा जाएगा।

यही वजह है कि बसपा के भीतर मायावती के बाद नेतृत्व को लेकर दीपिका का नाम चर्चा में आ गया है। हालांकि इसे अभी सीधे तौर पर मायावती द्वारा दीपिका को अपना उत्तराधिकारी घोषित करना नहीं कहा जा सकता। मायावती ने फिलहाल उनकी भूमिका को लेकर संभावना जताई है, अंतिम उत्तराधिकारी की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

आकाश आनंद को पहले बनाया गया था उत्तराधिकारी

मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। उस समय उन्हें बसपा की अगली पीढ़ी के चेहरे के तौर पर देखा गया था। लेकिन इसके बाद पार्टी में उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। मायावती ने कई मौकों पर उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया और बाद में वापस भी लाया। हाल के घटनाक्रम में उन्हें एक बार फिर पार्टी की जिम्मेदारियों से पूरी तरह अलग कर दिया गया।

इसके बाद ईशान आनंद के सक्रिय होने से यह माना जा रहा था कि मायावती उन्हें आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। ईशान को संगठन में जिम्मेदारी भी दी गई थी और उनका रिपोर्टिंग ढांचा मायावती तथा उनके पिता आनंद कुमार से जुड़ा था।

मायावती के ताजा बयान ने आकाश और ईशान दोनों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि दोनों को बसपा में कोई राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। इसे पार्टी में परिवारवाद को लेकर उनकी घोषित नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

मायावती ने संगठन में युवाओं को आगे बढ़ाने की बात भी कही है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए युवाओं को अधिक अवसर देने और संगठन में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। आगामी चुनावों के लिए पार्टी में युवाओं को प्राथमिकता देने की उनकी रणनीति भी सामने आई है।

क्या दीपिका संभालेंगी बसपा की कमान?

यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। दीपिका आनंद का नाम अचानक बसपा के भविष्य के नेतृत्व से जोड़कर देखा जाने लगा है, लेकिन फिलहाल इसे संभावना से आगे नहीं ले जाना चाहिए। मायावती ने दीपिका को सीधे अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। उन्होंने उनके लिए पार्टी के काम में भूमिका की संभावना जरूर छोड़ी है।

ऐसे में बसपा के भीतर नेतृत्व का अगला चेहरा कौन होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इतना जरूर है कि मायावती ने आकाश और ईशान दोनों को राजनीतिक भूमिका से बाहर रखने का फैसला करके उत्तराधिकार को लेकर चल रही पुरानी अटकलों को एक नया मोड़ दे दिया है।

परिवारवाद से दूरी का संदेश

मायावती के ताजा फैसले का एक बड़ा संदेश यह भी है कि वह बसपा को परिवार केंद्रित पार्टी की छवि से दूर रखना चाहती हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने की बात कही है। साथ ही उन्होंने ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दीपिका आनंद का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि आकाश और ईशान दोनों के लिए राजनीतिक रास्ता बंद करने के बाद मायावती ने दीपिका के लिए पार्टी में काम करने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में दीपिका वास्तव में बसपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती हैं या नहीं और मायावती उनके भविष्य को किस तरह आगे बढ़ाती हैं।

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